ट्रंप का बड़ा दांव: IMEC कॉरिडोर से ईरान को घेरेगा अमेरिका, तेल के रास्ते होंगे सुरक्षित
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वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) को अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के इतर जीसीसी (GCC) और अरब देशों के नेताओं के साथ हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में ट्रंप ने इसे मध्य पूर्व की भविष्य की सुरक्षा के लिए गेम चेंजर बताया।

ईरान के चेकपॉइंट्स से मुक्ति की रणनीति

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मध्य पूर्व का ऊर्जा बुनियादी ढांचा ईरान के नियंत्रण वाले समुद्री रास्तों पर बहुत अधिक निर्भर है। हाल के दिनों में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों ने इस निर्भरता के खतरों को उजागर किया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों को ईरानी नियंत्रण वाले रास्तों से हटाकर पाइपलाइनों और सुरक्षित रेल नेटवर्क के जरिए ले जाना अब एक रणनीतिक प्राथमिकता है।

IMEC का सुरक्षा कवच

भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) इसी रणनीति का केंद्र बिंदु है। यह गलियारा भारत को खाड़ी देशों और वहां से यूरोप से जोड़ेगा। इसमें आधुनिक रेलवे, शिप-रेल ट्रांजिट नेटवर्क और सड़क परिवहन शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि इस कॉरिडोर का उद्देश्य न केवल व्यापार को गति देना है, बल्कि क्षेत्र को उन चोकपॉइंट्स से मुक्त करना है जिन्हें ईरान अपनी दादागिरी के लिए इस्तेमाल करता है।

क्षेत्र में अमेरिका का नया गठबंधन

अरब नेताओं के साथ मंच साझा करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह क्षेत्र दशकों पुरानी चुनौतियों से उबरने के बेहद करीब है। उन्होंने इन देशों को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी बताया। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से हम मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दहलीज पर खड़े हैं। यह बैठक क्षेत्र के देशों के बीच बढ़ते तालमेल को दर्शाती है।

ईरान को ट्रंप की दो टूक चेतावनी

corridor के समर्थन के साथ ही ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को वित्तीय रूप से पहले ही अलग-थलग कर दिया है। ट्रंप ने तल्ख लहजे में कहा, एक समय ऐसा आएगा जब बहुत देर हो चुकी होगी, और हमारे पास उन्हें एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहने देने का अवसर नहीं होगा। मैं ऐसा देखना चाहूंगा कि वे अपनी नीतियों को बदलें।

क्या है भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर?

साल 2023 में शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी परियोजना दो मुख्य गलियारों पर आधारित है:

  1. ईस्टर्न कॉरिडोर: यह भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ेगा।
  2. नॉर्दर्न कॉरिडोर: यह खाड़ी देशों और यूरोप के बीच रेल और सड़क नेटवर्क का जाल बिछाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह समर्थन भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह गलियारा न केवल चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का विकल्प बन सकता है, बल्कि पश्चिम एशिया में ईरान के प्रभाव को कम करने का सबसे प्रभावी जरिया भी साबित होगा।

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