अंबाती रायडू का 41वां जन्मदिन: टैलेंट की कमी नहीं, फिर भी टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए करना पड़ा लंबा इंतज़ार!
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आज 23 सितंबर को अंबाती रायडू अपना 41वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय क्रिकेट में रायडू का सफर एक ऐसी कहानी है, जिसमें प्रतिभा, संघर्ष और विवादों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। उन्हें भारतीय जर्सी पहनने के लिए उम्र के उस पड़ाव तक इंतज़ार करना पड़ा, जहाँ कई खिलाड़ी अपने करियर का आधा सफर तय कर चुके होते हैं।

16 साल की उम्र में दस्तक

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जन्मे रायडू ने महज 16 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा। हैदराबाद के लिए खेलते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से जल्द ही सबको प्रभावित किया। 2002 में इंग्लैंड दौरे पर अंडर-19 टीम के लिए उनकी नाबाद 177 रन की पारी ने साबित कर दिया था कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं। उन्होंने 2004 में भारत की अंडर-19 टीम की कप्तानी भी संभाली।

27 साल की उम्र में मिला बुलावा

घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बावजूद, टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए उन्हें 27 साल की उम्र तक इंतज़ार करना पड़ा। 24 जुलाई 2013 को जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने वनडे डेब्यू किया। पहले ही मैच में नाबाद 63 रन बनाकर उन्होंने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे, लेकिन इसके बाद भी वे टीम में अपनी स्थायी जगह पक्की नहीं कर सके और लंबे समय तक अंदर-बाहर होते रहे।

इंटरनेशनल करियर: आंकड़ों की नज़र में

रायडू का अंतरराष्ट्रीय सफर महज छह साल का रहा। भारत के लिए उन्होंने 55 वनडे खेले, जिसमें 47.06 की बेहतरीन औसत से 1,694 रन बनाए। उनके नाम तीन शतक और 10 अर्धशतक दर्ज हैं। हालांकि, प्रतिभा के बावजूद उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका कभी नहीं मिला, जो उनके करियर की सबसे बड़ी कसक रही।

आईपीएल: जहां मिली पहचान

इंटरनेशनल क्रिकेट की तुलना में आईपीएल में रायडू का करियर कहीं अधिक प्रभावशाली रहा। मुंबई इंडियंस और बाद में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ जुड़कर उन्होंने खुद को एक मैच विनर साबित किया। लीग के कुल 203 मैचों में उन्होंने 4,348 रन बनाए, जो उनकी टी20 क्षमता का प्रमाण है।

मैदान का गुस्सा और 2019 का थ्री-डी विवाद

रायडू अपने खेल के साथ-साथ अपने आक्रामक व्यवहार के लिए भी चर्चा में रहे। चाहे जहीर खान से बहस हो या हरभजन सिंह के साथ मैदान पर नोकझोंक, वे अक्सर सुर्खियों में रहे। लेकिन उनके करियर का सबसे विवादास्पद मोड़ 2019 विश्व कप चयन के दौरान आया, जब थ्री-डी प्लेयर कहे जाने के बाद उन्होंने चयनकर्ताओं पर तंज कसा और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी।

हालांकि, उन्होंने बाद में संन्यास वापस लिया, लेकिन भारतीय टीम के दरवाजे उनके लिए पूरी तरह बंद हो चुके थे। आज उनके जन्मदिन पर क्रिकेट प्रेमियों के बीच यही चर्चा होती है कि क्या एक और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को उसकी क्षमता के अनुरूप अवसर मिल पाए?

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