डील करूं या सर्वनाश : ट्रंप ने UN में ईरान के सामने रखा दो-टूक विकल्प
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वह अमेरिका के साथ एक नया समझौता करे या फिर पूरी तरह से विनाश का सामना करने के लिए तैयार रहे।

हिम्मत दिखाई है, टालमटोल नहीं ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के अन्य नेता ईरान के मुद्दे पर केवल टालमटोल कर रहे थे, तब उन्होंने साहस दिखाते हुए कड़े कदम उठाए। ट्रंप ने ईरान को दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक करार दिया।

परमाणु हथियारों पर ट्रंप की रेड लाइन अमेरिकी राष्ट्रपति ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने केवल बातें नहीं की हैं, बल्कि ठोस सैन्य कार्रवाई करके दिखाई है। ट्रंप का यह संदेश उन सभी देशों के लिए था जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चुप बैठे हैं।

आर्थिक घेराबंदी की अपील ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पर दबाव तब तक बना रहना चाहिए जब तक वह तीन मुख्य शर्तों को नहीं मानता: वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद करना, परमाणु हथियार बनाने की होड़ रोकना और आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह खत्म करना।

समझौते की उम्मीद अभी बाकी? कड़े तेवर दिखाने के साथ-साथ ट्रंप ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में ईरान के साथ कोई डील हो सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी चुनावों के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुल सकता है और अंततः किसी समाधान पर सहमति बन सकती है।

अविश्वास का माहौल और बायकॉट ट्रंप के भाषण के दौरान तनाव साफ तौर पर नजर आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब ट्रंप ईरान की कड़ी आलोचना कर रहे थे, तब ईरानी प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य विरोध स्वरूप सदन से बाहर चले गए। न्यूयॉर्क में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी मौजूद हैं, लेकिन फिलहाल दोनों नेताओं के बीच किसी भी आधिकारिक मुलाकात की संभावना नहीं है।

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