दिल्ली में 10 दिन में रेप की 3 दहलाने वाली घटनाएं: AAP ने उठाए सुरक्षा पर सवाल, कहा- गुंडों पर लगाम जरूरी
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दिल्ली में पिछले 10 दिनों के भीतर हुए तीन जघन्य रेप मामलों ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं के बाद से आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

क्या है 10 दिनों का खौफनाक रिकॉर्ड?

  1. स्वरूप नगर (11 सितंबर): 17 वर्षीय युवती के साथ गैंगरेप के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। आरोपियों ने चाकू मारकर उसका शव खेत में फेंक दिया था। इस मामले में एक 19 वर्षीय युवक और तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।
  2. केशवपुरम (19 सितंबर): एक 43 वर्षीय महिला को आंखों की जांच के बहाने बुलाकर बेहोश किया गया और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया गया। आरोपी विकास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
  3. कालकाजी (21 सितंबर): पार्क में टहल रही एक 17 वर्षीय किशोरी को तीन बदमाशों ने पुलिसकर्मी बनकर डराया और सुनसान जगह ले जाकर गैंगरेप किया। मुख्य आरोपी आसिफ को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।

AAP का सीधा हमला: पुलिस की मंशा पर सवाल

दिल्ली सरकार के मंत्री और AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इन घटनाओं को पुलिस की विफलता करार दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस महिलाओं की सुरक्षा के बजाय राजनीतिक एजेंडे में ज्यादा व्यस्त है।

भारद्वाज ने आरोप लगाया, पुलिस तब तक इंतजार करती है जब तक कोई बड़ा अपराध न हो जाए। यदि शुरुआत में ही मनचलों और गुंडों पर सख्ती की गई होती, तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने जनकपुरी में तीन साल की बच्ची के साथ हुए रेप मामले का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस ने उस समय भी पीड़ितों को डराने का काम किया था।

पुलिस की कार्रवाई का क्या है पक्ष?

पुलिस का दावा है कि वह हर मामले में त्वरित कार्रवाई कर रही है। कालकाजी मामले में मुठभेड़ कर आरोपी को गिरफ्तार करना पुलिस की सक्रियता का उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि दिखावे की कार्रवाई से अपराध नहीं रुकेंगे।

दिल्ली की सड़कों पर बढ़ती असुरक्षा के बीच अब आम जनता में भी डर का माहौल है। सवाल यह है कि यदि राजधानी में कानून की रक्षा करने वाली पुलिस खुद कठघरे में होगी, तो महिलाएं खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेंगी?

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