उत्तर प्रदेश की राजनीति 2027 के विधानसभा चुनाव के करीब आते ही एक बार फिर उबाल पर है। बीजेपी के मिशन-71 से लेकर अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले तक, सियासी पारा चरम पर है। पोस्टर युद्ध और बयानों की जंग ने साफ कर दिया है कि अगला चुनाव सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि साख बचाने का कड़ा मुकाबला है।
फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए 202 सीटों का बहुमत का आंकड़ा हासिल करना मुख्य लक्ष्य है। 2022 में बीजेपी ने 255 सीटें जीतकर 41.29% वोट शेयर हासिल किया था, जबकि सपा 111 सीटों के साथ 32.06% पर रही थी। वर्तमान में भाजपा के पास 258 और सपा के पास 101 विधायक हैं।
पश्चिमी यूपी की 71 सीटों पर भाजपा ने अपना पूरा जोर लगा दिया है। बीजेपी नेता नितिन नवीन ने 4,800 शक्ति केंद्रों के संयोजकों के साथ रणनीति बनाते हुए प्रति बूथ जीत का मंत्र दिया है। वहीं, अखिलेश यादव ने हर विधानसभा में 27 हजार वोट बढ़ाने या विपक्षी वोट को कम करने का लक्ष्य रखा है। 24 सितंबर से निकलने वाला PDA रथ सपा की जमीनी ताकत परखने का माध्यम बनेगा।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के बीच का टकराव विपक्षी एकता की पोल खोल रहा है। सीटों के बंटवारे को लेकर मसूद की बेचैनी और इकरा का सपा नेतृत्व पर भरोसा, यह दर्शाता है कि मुस्लिम वोटों के हकदार को लेकर दोनों दलों में खींचतान शुरू हो चुकी है।
मेरठ में सीएम योगी आदित्यनाथ का बाबर के अनुयायी बनाम बजरंगी के भक्त वाला बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा हिंदुत्व के पुराने नैरेटिव को धार देने में जुटी है। वहीं, लखनऊ समेत कई जिलों में लगे वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया वाले पोस्टर ने अतीक, मुख्तार और आजम खान के जरिए सपा को घेरने की नई रणनीति को जन्म दिया है।
बीजेपी के सामने सत्ता विरोधी लहर और युवाओं में बेरोजगारी-पेपर लीक के मुद्दे बड़ी चुनौती हैं, जबकि विपक्ष के लिए सीट शेयरिंग और ओवैसी जैसे दलों की मौजूदगी राह मुश्किल कर रही है। सर्वे में योगी आदित्यनाथ का पलड़ा भारी जरूर दिख रहा है, लेकिन 49% मतदाता अपने मौजूदा विधायकों से नाराज हैं।
निष्कर्षतः, 2027 का चुनाव संगठन की ताकत और जनता के आक्रोश के बीच का एक बड़ा संघर्ष साबित होने वाला है। यह चुनाव न केवल यूपी, बल्कि देश की आगामी सियासी दिशा भी तय करेगा।
*Lucknow, Uttar Pradesh: A poster featuring images of Atiq Ahmed, Azam Khan and Mukhtar Ansari has been put up in the Gomti Nagar area. The poster reads, “Akhilesh ke mafia, mafia ke Akhilesh,” and mentions the alleged land encroachment case at Jauhar University involving mafia… pic.twitter.com/rOxcZMp0Bv
— IANS (@ians_india) September 21, 2026
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