UNGA में जयशंकर की दो टूक: दुनिया पर गहराता भू-राजनीतिक संकट, अब सहयोग ही एकमात्र रास्ता
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था पर मंडराते खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि दुनिया इस वक्त एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव से गुजर रही है, लेकिन भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आपसी तनाव इसे खतरनाक मोड़ पर ले आए हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर मंडराता खतरा न्यूयॉर्क में पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज़्म समिट को संबोधित करते हुए जयशंकर ने चिंता जताई कि अगर मौजूदा टकरावों को नहीं रोका गया, तो यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव को कमजोर कर देगा। उन्होंने कहा कि देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन वैश्विक संस्थाओं के बुनियादी सिद्धांतों को ही नष्ट कर रही है, जिनके जरिए दुनिया मिलकर काम करती आई है।

शांति से लेकर महामारी तक: सब कुछ सहयोग पर निर्भर विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि बहुपक्षीय सहयोग केवल एक कूटनीतिक शब्द नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे अहम चुनौतियों का एकमात्र समाधान है। उन्होंने शांति और सुरक्षा के अलावा जलवायु न्याय, नई तकनीक, आतंकवाद का मुकाबला, सप्लाई चेन की मजबूती और भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी जैसे मुद्दों को गिनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन समस्याओं का हल केवल देशों की साझा इच्छाशक्ति से ही संभव है।

बेहतर के चक्कर में उपलब्धियों को न भूलें मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में सुधार की वकालत करते हुए जयशंकर ने यह भी याद दिलाया कि हमने अब तक जो कुछ भी हासिल किया है, वह सामूहिक प्रयासों का ही परिणाम है। उन्होंने नसीहत दी कि बेहतर भविष्य की कोशिश के दौरान उन अच्छी चीजों और उपलब्धियों को नहीं गंवाना चाहिए, जिन्हें हमने पिछले दशकों में कड़ी मेहनत से बनाया है।

4-F संकट पर तत्काल कार्रवाई की मांग जयशंकर ने दुनिया को 4-F संकट (ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त) को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में पैदा हुई चुनौतियों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्री ने व्यावहारिक कूटनीति पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी शांति वार्ताओं का परिणाम आने तक हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय, तत्काल समाधान वाली लक्षित पहलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

सुधार की ओर बढ़ते कदम भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में सुधार और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की मांग करता रहा है। ब्रिक्स की अध्यक्षता से लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की दावेदारी तक, नई दिल्ली लगातार यह संदेश दे रही है कि एक सुधारे गए बहुपक्षीय सिस्टम के बिना भविष्य सुरक्षित नहीं है। जयशंकर का यह बयान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती मुखरता और नेतृत्व की क्षमता को दर्शाता है।

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