देश के प्रीमियम इंजीनियरिंग संस्थान IITs इस वक्त गहरे संकट में हैं। एक तरफ जहां ये संस्थान दुनिया को बेहतरीन इंजीनियर देने के लिए जाने जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की खुदकुशी की बढ़ती घटनाएं इस सपनों की दुनिया के पीछे छिपे अंधेरे को बयां कर रही हैं।
साहिल वाकोडे केस और सिस्टम पर सवाल हाल ही में IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा के दौरान मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़े जाने के कुछ ही घंटों बाद साहिल ने अपनी जान दे दी। अब मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि साहिल के परिजनों ने उनके टीचर सूर्यनारायण डुल्ला पर जातिसूचक गालियां देने और झूठे केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
क्यों जान दे रहे छात्र? कमेटी ने बताईं वजहें IIT दिल्ली की एक जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उन कारणों को उजागर किया है जो छात्रों को मौत की दहलीज तक ले जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारी-भरकम कोर्स का दबाव, ग्रेडिंग सिस्टम के कारण बढ़ता गलाकाट कॉम्पिटिशन, अच्छे नंबर लाने का तनाव और जाति-लिंग के आधार पर होने वाला भेदभाव मुख्य कारण हैं।
छात्र संगठनों के एक इंटरनल सर्वे में भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 61% छात्रों का मानना है कि एकेडमिक स्ट्रेस ही सुसाइड की सबसे बड़ी वजह है। इसके अलावा नौकरी को लेकर अनिश्चितता (12%), पारिवारिक समस्याएं (10%) और उत्पीड़न (6%) ने छात्रों की मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाला है।
आंकड़े जो डराते हैं: 19 सालों में 115 मौतें एक RTI से मिली जानकारी के अनुसार, साल 2005 से 2024 के बीच देशभर की IITs में 115 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से 98 मौतें कैंपस के अंदर हुईं। संस्थानों की रैंकिंग के साथ मौतों का ग्राफ भी चिंताजनक है:
IIT बॉम्बे में 9 महीने में 3 मौतें साल 2026 IIT बॉम्बे के लिए बेहद काला साबित हो रहा है। पिछले 9 महीनों में यहां 3 छात्रों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। फरवरी में छत से कूदकर, जुलाई में कमरे में फांसी लगाकर और सितंबर में साहिल वाकोडे की दुखद मौत। ये घटनाएं बताती हैं कि कैंपस का माहौल कहीं न कहीं छात्रों को सुरक्षित महसूस कराने में नाकाम रहा है।
क्या है हालात का सच? पिछले 6 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल औसतन 7 से 9 छात्र IITs में हार मान रहे हैं। IIT दिल्ली का हाल तो और भी बुरा है, जहां पिछले 4 वर्षों में 8 छात्रों ने अपनी जान दी है। डिप्रेशन, एन्जायटी और परीक्षा का डर—ये वो शब्द हैं जो अब IIT के हॉस्टलों की दीवारों में गूंज रहे हैं।
सवाल यह है कि क्या ये संस्थान केवल पढ़ाई की मशीनों को तैयार कर रहे हैं या फिर एक ऐसी संवेदनशील पीढ़ी को, जिसे असफलता का सामना करना नहीं सिखाया गया? अब वक्त आ गया है कि शिक्षा के इन मंदिरों में डिग्री से ज्यादा छात्रों की मानसिक सेहत को प्राथमिकता दी जाए।
*FOUND WITH PHONE IN EXAM HALL. IIT BOMBAY STUDENT ENDS LIFE. PROTESTS ROCK CAMPUS.
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) September 19, 2026
A second-year IIT Bombay student died by suicide on Friday, hours after he was found using a mobile phone during an examination. According to an official statement from the institute, the student… pic.twitter.com/OVwqJ0P3hC
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