अयोध्या हत्याकांड: चंद्रशेखर आजाद ने दी सरकार को चेतावनी, कहा- 30 सितंबर तक का है वक्त
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अयोध्या के पूराकलंदर थाना क्षेत्र के कंदैला गांव में हुए रामलगन मौर्य और उनकी मां पार्वती देवी हत्याकांड ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला? पुलिस के अनुसार, 25 अगस्त को रंजिश और पुरानी जमीन के विवाद में रामलगन और उनकी मां पर हमला किया गया था। हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं और बम फेंके। इस हमले में रामलगन की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी घायल मां पार्वती देवी ने लंबी जद्दोजहद के बाद 14 सितंबर को अस्पताल में दम तोड़ दिया।

पुलिस की कार्यशैली पर खड़े किए सवाल चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा दावा किया कि हत्या से 15 दिन पहले ही रामलगन को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। चंद्रशेखर ने कहा, अगर हत्या की घोषणा खुलेआम होने लगे और पुलिस मूकदर्शक बनी रहे, तो यह उत्तर प्रदेश में सुशासन के दावों की पोल खोलता है।

जिंदा बम मिलना खौफनाक आजाद ने घटना में इस्तेमाल हुए हथियारों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस तरह अस्पताल से लौटते वक्त घात लगाकर हमला किया गया और मौके से जिंदा बम बरामद हुए, उससे स्पष्ट है कि अपराधी बेखौफ हैं। उन्होंने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे सुरक्षा में भारी चूक करार दिया।

आर्थिक तंगी और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद चंद्रशेखर ने उनके आर्थिक हालातों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अब तक परिवार को मुआवजा या सरकारी नौकरी क्यों नहीं दी गई? साथ ही, उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी कटाक्ष किया कि संकट के समय वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े नजर नहीं आए।

30 सितंबर तक का अल्टीमेटम सरकार को चेतावनी देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी 30 सितंबर तक न्याय का इंतजार करेगी। उन्होंने पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय दिलाने की मांग करते हुए सरकार को घेरा है।

गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले में 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी विजयभान सिंह को 18 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश जारी है। अब देखना यह होगा कि 30 सितंबर की समय सीमा खत्म होने तक प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

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