राहुल गांधी का छात्रों की गूंज कार्यक्रम: दावों की हकीकत या सियासी जुमलेबाजी?
News Image

मध्य प्रदेश के इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद प्रदेश का सियासी पारा गरमा गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने युवाओं के बीच कई बड़े दावे किए, लेकिन सोशल मीडिया पर सक्रिय फैक्ट-चेकर्स ने उनके बयानों की परतें उधेड़कर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आइए जानते हैं उन 5 बड़े दावों को, जिन पर सियासी घमासान मचा है।

1. MPPSC भर्ती का गणित कितना सटीक?

राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में MPPSC की भर्तियों में 13% पद रोके गए हैं, जिससे 4.87 लाख पद पेंडिंग हैं। फैक्ट-चेक के अनुसार, 87:13 का फॉर्मूला महज चार साल पुराना (सितंबर 2022) है, न कि आठ साल। साथ ही, कानूनी पेच में केवल 10,000 पद फंसे हैं, न कि 4.87 लाख जैसा कि दावा किया गया।

2. ओबीसी आरक्षण: किसका फैसला, किसकी चूक?

राहुल ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने ओबीसी आरक्षण को 14% से 27% करने के फैसले पर रोक लगाई। हकीकत यह है कि 19 मार्च 2019 को तत्त्कालीन कमलनाथ सरकार के कार्यकाल के दौरान ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाई थी। कानूनी बारीकियों को नजरअंदाज कर जारी किए गए नोटिफिकेशन के कारण यह स्थिति बनी।

3. अडानी समूह और कांग्रेस का दोहरा मापदंड

अडानी पर निशाना साधते हुए राहुल ने केंद्र सरकार और उद्योगपति के संबंधों पर सवाल उठाए। लेकिन जवाब में सवाल उठा कि अगर यह गठजोड़ गलत है, तो कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में अडानी समूह के साथ सरकारी एमओयू (MoU) और प्रोजेक्ट्स क्यों चल रहे हैं?

4. असली छात्र या राजनीतिक कार्यकर्ता?

कार्यक्रम में राहुल ने दावा किया कि वे असली छात्रों की समस्याओं को सुन रहे हैं। हालांकि, मंच पर गैर-राजनीतिक छात्र के तौर पर पेश किए गए तनय शर्मा की पहचान एनएसयूआई (NSUI) के पूर्व राज्य प्रवक्ता के रूप में सामने आई है। इस खुलासे ने कार्यक्रम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

5. आदिवासी शिक्षा और एकलव्य स्कूलों का आईना

राहुल ने मोदी सरकार पर आदिवासियों को शिक्षा से दूर रखने का आरोप लगाया। डेटा बताता है कि 2014-15 में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों (EMRS) की संख्या 129 थी, जो 2026 तक बढ़कर 511 हो गई है। इनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या भी 40 हजार से बढ़कर 1.5 लाख तक पहुंच गई है, जो इस दावे को गलत साबित करती है।

निष्कर्ष: राहुल गांधी के इस कार्यक्रम ने युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश तो की, लेकिन तथ्यात्मक खामियों और राजनीतिक चश्मे ने इन दावों की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

दार्जिलिंग में हनीमून बना मातम: बारबेक्यू की आग ने नई-नवेली दुल्हन को लपटों में लपेटा, CCTV देख दहल जाएगा दिल

Story 1

दायरा का खौफनाक सस्पेंस: करीना और पृथ्वीराज की जुगलबंदी ने दर्शकों को हिलाया

Story 1

नगर निगम दफ्तर बना कुत्ता घर : निफाड में अनोखे विरोध प्रदर्शन से मचा हड़कंप

Story 1

पिता की मेहनत को सलाम: मुंबई के बेटे ने ऑटो-रिक्शा की रेप्लिका में सजाया बप्पा का दरबार

Story 1

प्यार किया तो 21 कोड़े, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर 100: दर्द से बेहोश होने तक नहीं रुकती यह खौफनाक सजा

Story 1

ट्रेन में चोरी और सीनाजोरी: बैग में निकलीं रेलवे की चादरें, पकड़े जाने पर महिला का अजीब तर्क

Story 1

गणेशोत्सव पर BMC की गाइडलाइंस जारी: सुरक्षा और पर्यावरण के लिए तय हुए नए नियम

Story 1

हार्दिक पांड्या अभी वनडे के लिए तैयार नहीं, गंभीर ने बताया क्यों नहीं करेंगे जल्दबाजी

Story 1

असम में बड़ी कार्रवाई: अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का जत्था पकड़ा गया, 27 लोग हिरासत में

Story 1

मां राजनीति का विषय नहीं : राहुल गांधी के वायरल वीडियो पर मचा सियासी बवाल, बीजेपी ने घेरा