भारत की बढ़ती सैन्य ताकत देख बैकफुट पर पाकिस्तान, सेना के प्रवक्ता बोले- हमसे मुकाबला करना मुमकिन नहीं
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भारत की तेजी से बढ़ती मिसाइल शक्ति और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाल ही में पाकिस्तान सेना के शीर्ष प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारत की सैन्य ताकत को लेकर जो बयान दिया है, वह यह बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तान अब खुद को इस रेस से बाहर मान चुका है।

हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं है पाकिस्तान एक इंटरव्यू के दौरान जब लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी से भारत के लगातार बढ़ते रक्षा बजट और मिसाइल सिस्टम के विस्तार पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, हम भारत की सैन्य क्षमताओं का सम्मान करते हैं। हम समझते हैं कि नई दिल्ली अपनी सुरक्षा के लिए संसाधनों का बड़ा निवेश कर रही है। हालांकि, साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान भारत के साथ किसी भी तरह की हथियार दौड़ (Arms Race) में शामिल होने का इच्छुक नहीं है।

भारत का प्रोजेक्ट कुशा और अभेद्य सुरक्षा कवच भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है। हाल ही में डीआरडीओ (DRDO) द्वारा प्रोजेक्ट कुशा के सफल परीक्षण ने सामरिक संतुलन को भारत के पक्ष में मजबूती से झुका दिया है। इस मिसाइल सिस्टम की मारक क्षमता 400 किलोमीटर तक है, जो किसी भी घुसपैठ को हवा में ही ढेर करने में सक्षम है।

स्वदेशी तकनीक का दम भारत अब केवल हथियारों को खरीद नहीं रहा, बल्कि उन्हें बना भी रहा है। आकाश, आकाश-NG, QRSAM और VSHORADS जैसे स्वदेशी सिस्टम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं। इसके अलावा, अगस्त 2026 में रक्षा मंत्रालय ने निजी कंपनियों को मिसाइल निर्माण तकनीक सौंपने का जो बड़ा फैसला लिया है, उससे भारत वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़े निर्यातक के रूप में उभरने की तैयारी कर रहा है।

रणनीतिक तालमेल: स्वदेशी भी और विदेशी भी भारत की रक्षा नीति अब दोतरफा है। एक तरफ ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें रूस के सहयोग से विकसित की गई हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल के साथ मिलकर एमआरएसएएम (MRSAM) जैसे सिस्टम पर काम हो रहा है। भारत की यह रणनीति न केवल उसे आधुनिक हथियारों से लैस कर रही है, बल्कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसे कार्यक्रमों के जरिए भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रही है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का लोहा अब पड़ोसी देश ने भी मान लिया है। नई दिल्ली की रक्षा तैयारियां न केवल क्षेत्रीय संतुलन को नया आकार दे रही हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य हैसियत को भी काफी ऊंचा कर रही हैं।

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