सेंसर बोर्ड में सितारों का जमावड़ा: पंकज त्रिपाठी से लेकर प्रीति जिंटा तक, CBFC का नया पैनल तैयार
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केंद्र सरकार ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के नए पैनल का पुनर्गठन कर दिया है। इस बार बोर्ड में मनोरंजन जगत, संगीत और साहित्य के दिग्गज चेहरों को जगह दी गई है। यह नया पैनल अगले तीन वर्षों तक फिल्मों के प्रमाणीकरण और सेंसरशिप से जुड़े अहम फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

कौन-कौन हैं शामिल?

सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, 18 सदस्यीय इस पैनल में सिनेमा और कला जगत के कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। प्रमुख नामों में पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा, मनोज जोशी, पल्लवी जोशी, रूपाली गांगुली और बंगाली सिनेमा के दिग्गज प्रोसेनजीत चटर्जी शामिल हैं।

इनके अलावा, संगीत की दुनिया से ग्रैमी विजेता रिकी केज और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन भी बोर्ड का हिस्सा होंगे। साथ ही, यतींद्र मिश्रा, अभिषेक जैन, हंसराज हंस, सुप्रिया यारलागड्डा, नीला माधव पांडा, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे जैसे नाम भी इस पैनल में शामिल किए गए हैं। फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

तीन साल के लिए मिली जिम्मेदारी

यह नया पैनल मौजूदा नियमों के तहत तीन साल की अवधि के लिए काम करेगा। हालांकि, शशि शेखर वेम्पति, जिन्हें मई 2026 में नियुक्त किया गया था, वह CBFC के चेयरपर्सन पद पर बने रहेंगे। नए सदस्य तुरंत अपना कार्यभार संभालेंगे और फिल्मों की जांच व सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में अपनी राय देंगे।

क्या काम करता है CBFC?

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला एक वैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 के प्रावधानों के तहत फिल्मों की स्क्रीनिंग करना और उन्हें रिलीज के लिए उपयुक्त सर्टिफिकेट जारी करना है। बिना CBFC की मंजूरी के भारत में किसी भी फिल्म को प्रदर्शित करना संभव नहीं है।

कैसे काम करती है बोर्ड की व्यवस्था?

CBFC का मुख्यालय मुंबई में है और देशभर में इसके 9 क्षेत्रीय कार्यालय (मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, तिरुवनंतपुरम, हैदराबाद, नई दिल्ली, कटक और गुवाहाटी) काम करते हैं। प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय में एक सलाहकार पैनल होता है, जो फिल्मों की समीक्षा में बोर्ड की मदद करता है। इन सदस्यों का चयन अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों में से किया जाता है।

फिल्मों का सर्टिफिकेशन सिनेमैटोग्राफ एक्ट और सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जाता है। अब देखना यह होगा कि सितारों से सजे इस नए पैनल के आने के बाद फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया में किस तरह के बदलाव और सतर्कता देखने को मिलती है।

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