क्या यही मोदी जी के अच्छे दिन हैं? UPI पर MDR फीस को लेकर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला
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यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए इसे आम जनता पर महंगाई का एक और बोझ करार दिया है।

तेजस्वी का तीखा तंज तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि क्या ये वही अच्छे दिन हैं जिनका वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। उन्होंने कहा कि पहले से ही जनता गैस, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से त्रस्त है, और अब डिजिटल पेमेंट को भी शुल्क के दायरे में लाकर आम आदमी की जेब खाली करने की तैयारी है।

तेजस्वी ने नोटबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय काला धन खत्म करने का दावा किया गया था, लेकिन उसके नतीजे और अब की आर्थिक नीतियां जनता को ही परेशान कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावों के समय ऐसे फैसले टाल देती है और बाद में जनता पर बोझ डाल देती है।

क्या है सरकार का स्पष्टीकरण? सरकार ने विपक्ष के दावों के बीच स्थिति साफ की है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह शुल्क व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजेक्शन पर लागू नहीं होगा, जो कि पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

सरकार का कहना है कि MDR केवल 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यक्ति से व्यापारी (P2M) ट्रांजेक्शन पर लगेगा। इसमें भी 96 फीसदी छोटे लेन-देन इस दायरे से बाहर रहेंगे। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट ढांचे को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।

MDR की दरें और नियम नए फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेन-देन पर अधिकतम 0.4 फीसदी MDR लगेगा। रेलवे, बीमा, ईंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए 5 रुपये का फ्लैट शुल्क तय किया गया है।

बड़ी ट्रांजेक्शन (75,000 रुपये से ऊपर) के लिए 300 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन की सीमा तय की गई है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों से वसूल न करें।

क्या आगे बढ़ेगी सरकार? विपक्षी विरोध के बावजूद सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस फैसले को वापस लेने का कोई विचार नहीं है। सरकार का तर्क है कि इस शुल्क से मिलने वाली राशि का उपयोग डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और छोटे व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं देने में किया जाएगा। हालांकि, आम आदमी के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह शुल्क वास्तव में उन तक नहीं पहुंचता है या फिर इनडायरेक्ट रूप से महंगाई में इजाफा करता है।

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