हम भारत से हथियार की होड़ में नहीं : पाकिस्तानी सेना ने पहली बार सैन्य शक्ति को दी स्वीकारोक्ति
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पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक बड़ा बयान देते हुए भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को न केवल स्वीकार किया है, बल्कि उनके प्रति सम्मान भी व्यक्त किया है। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान नई दिल्ली के साथ किसी भी तरह की हथियारों की दौड़ (Arms Race) का हिस्सा नहीं बनना चाहता।

भारत की सैन्य ताकत का सम्मान एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे भारत के एयर डिफेंस और मिसाइल प्रोग्राम को लेकर सवाल पूछा गया, तो जनरल चौधरी ने कहा, हम भारतीय सैन्य क्षमताओं का सम्मान करते हैं। हम समझते हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए भारी संसाधन और पैसा खर्च कर रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हम उनके साथ किसी प्रतिस्पर्धा में हैं। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का ध्यान केवल अपनी रक्षात्मक क्षमताओं पर है और किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ उनका कोई आक्रामक इरादा नहीं है।

भारत का तेजी से बढ़ता रक्षा नेटवर्क पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मई 2025 में नवदुर्गा डिफेंस टेस्टिंग रेंज की नींव और जुलाई 2026 में प्रोजेक्ट कुशा के तहत 400 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण है। इसके अलावा, आकाश, क्यूआरएसएएम (QRSAM) और ब्रह्मोस जैसी प्रणालियां भारत के एयर डिफेंस नेटवर्क को अभेद्य बना रही हैं।

निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर भारत अब केवल सरकारी संस्थानों पर निर्भर नहीं है। हाल ही में सरकार ने रक्षा तकनीक को निजी कंपनियों को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है। इससे देश में रक्षा उपकरणों के उत्पादन में तेजी आएगी। डीआरडीओ (DRDO) की तकनीकों का निजी क्षेत्र में जाना भारत की औद्योगिक रक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव है।

रूस के साथ सुपर सुखोई और भविष्य की योजनाएं स्वदेशी ताकत के साथ, भारत अपने विदेशी सहयोग को भी मजबूती दे रहा है। रूस के साथ 11 अरब डॉलर के सुपर सुखोई (Su-30MKI अपग्रेड) प्रोजेक्ट पर चर्चा चल रही है। साथ ही, रूस द्वारा Su-57 विमान और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम के प्रस्ताव ने रक्षा गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

रणनीतिक अंतर: आत्मनिर्भरता बनाम बाहरी निर्भरता पाकिस्तान और भारत के रक्षा दृष्टिकोण में जमीन-आसमान का अंतर साफ दिख रहा है। जहां पाकिस्तान आज भी चीन और तुर्किये जैसे देशों से सैन्य उपकरणों के लिए बाहरी मदद पर निर्भर है, वहीं भारत अपनी विदेश नीति को अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता के साथ जोड़ रहा है। भारत का लक्ष्य केवल हथियार खरीदना नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े रक्षा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित होना है।

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