ममता बनाम रिताब्रत: TMC के चुनाव चिह्न पर आर-पार की लड़ाई, कल दिल्ली में EC की अहम सुनवाई
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पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ी वर्चस्व की जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। पार्टी के नाम और घास के ऊपर दो फूल वाले चुनाव चिह्न पर मालिकाना हक को लेकर ममता बनर्जी और बागी नेता रिताब्रत बनर्जी का गुट आमने-सामने है। इस मामले में चुनाव आयोग (ECI) ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों को तलब किया है।

कल दिल्ली में होगी महत्वपूर्ण सुनवाई चुनाव आयोग ने रिताब्रत बनर्जी को पत्र लिखकर 17 सितंबर, 2026 को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में बुलाया है। आयोग ने बागी खेमे के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सुनवाई के लिए उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इस बैठक में पार्टी के भविष्य और चुनाव चिह्न के स्वामित्व पर चर्चा होगी।

उपचुनाव के चलते आयोग का दबाव नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। दोनों गुटों ने इन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं और दोनों ही आधिकारिक चुनाव चिह्न का दावा कर रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया के बीच उपजे इस संकट को देखते हुए, चुनाव आयोग गुरुवार को कोई बड़ा अंतरिम आदेश जारी कर सकता है।

आयोग के पास क्या हैं विकल्प? अधिकारियों के अनुसार, चुनाव आयोग के पास कई विकल्प मौजूद हैं। या तो आयोग चुनाव चिह्न किसी एक गुट को आवंटित कर सकता है, या फिर विवाद सुलझने तक इसे फ्रीज (रोक) भी किया जा सकता है। फिलहाल, आयोग पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की वैधता की जांच कर रहा है।

विवाद की जड़: संविधान बनाम संशोधन यह विवाद 22 जून से तब शुरू हुआ जब रिताब्रत बनर्जी ने पार्टी में संवैधानिक संकट का हवाला देते हुए एक नई राष्ट्रीय कार्य समिति की घोषणा कर दी। रिताब्रत का तर्क है कि पार्टी का संविधान हर तीन साल में नई समिति के गठन की मांग करता है, जिसे ममता गुट ने पूरा नहीं किया।

इसके विपरीत, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि विरोधी गुट पुराने नियमों का हवाला देकर भ्रम फैला रहा है। पार्टी का कहना है कि संगठनात्मक संशोधन और प्रक्रियाएं पूरी तरह वैध हैं और बागी गुट की 22 जून वाली बैठक असंवैधानिक थी। अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग किसके दावों को तवज्जो देता है।

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