बाढ़ में डूबा बिहार: राहत की जद्दोजहद के बीच सियासी जंग तेज
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बिहार इस वक्त भीषण बाढ़ की चपेट में है। राज्य के 50 लाख से अधिक लोग इस संकट से जूझ रहे हैं। जहाँ एक तरफ आम लोग अपनी जान-माल की रक्षा में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ राहत कार्यों के बीच श्रेय लेने और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की सियासी होड़ शुरू हो गई है।

पप्पू यादव का तेजस्वी पर तीखा प्रहार

पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा, विपक्ष का काम क्या सिर्फ ढपली बजाना है? पप्पू यादव ने तेजस्वी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे लालू यादव का बेटा होने का घमंड छोड़ें और अपने क्षेत्र राघोपुर की सुध लें।

सांसद ने तंज कसा कि चुनाव के दौरान जो हेलीकॉप्टर यात्राओं के लिए उपलब्ध रहते हैं, वे आपदा के समय जनता के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किए जा रहे? उन्होंने तेजस्वी पर संपत्ति जमा करने और जनता की परवाह न करने का गंभीर आरोप लगाया है।

प्रशांत किशोर की बीजेपी को 500 करोड़ की चुनौती

जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए उन्हें आईना दिखाया है। पीके ने दावा किया कि बीजेपी के पास 30 हजार करोड़ रुपये का फंड है। उन्होंने चुनौती दी कि यदि बीजेपी वाकई बिहार के बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनशील है, तो उसे तत्काल अपने फंड से 500 करोड़ रुपये राहत कार्य के लिए जारी करने चाहिए।

इसके साथ ही, प्रशांत किशोर ने बिहार की बाढ़ को नेताओं और अधिकारियों के लिए कमाई का जरिया करार दिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण ही बांध हर साल टूटते हैं और सरकारें इसका स्थायी समाधान नहीं चाहतीं।

आरजेडी का बीजेपी के उत्सव पर तंज

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी पर तीखा वार किया है। पार्टी ने बीजेपी नेता नितिन नवीन का एक वीडियो साझा करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि आम जनता अपने डूबे हुए घरों और भूखे बच्चों को भूलकर पीएम मोदी के जन्मदिन पर घी के दीये जलाए। आरजेडी ने केंद्र और राज्य सरकार पर बाढ़ के नाम पर बिहार की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।

सरकार का राहत प्रयास

सियासी बयानबाजी के बीच, बिहार सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। सरकार की ओर से प्रत्येक प्रभावित परिवार के बैंक खाते में 7 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी जा रही है। हालांकि, राहत सामग्री और इसके वितरण की गति को लेकर विपक्ष का आरोप है कि ये नाकाफी है।

बिहार के इस जल प्रलय में अब देखना यह होगा कि क्या सियासत से ऊपर उठकर सरकार और विपक्ष मिलकर जनता की सुध लेते हैं, या यह राजनीतिक खींचतान इसी तरह जारी रहेगी।

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