सऊदी अरब ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों ने इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का को ड्रोन हमले के जरिए निशाना बनाने की कोशिश की। सऊदी सेना के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इस ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ।
सऊदी के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी के लिए पवित्र स्थलों और वहां आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा रेड लाइन है। उन्होंने इसे निर्दोष नागरिकों में दहशत फैलाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। हूती नेता हाजेम अल-असद ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे झूठ का पुलिंदा बताया है।
हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे न तो मक्का को निशाना बना रहे हैं और न ही किसी पवित्र स्थल को नुकसान पहुंचाने का उनका कोई इरादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सऊदी अरब सहानुभूति हासिल करने के लिए ऐसे पुराने हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है।
हमले की स्थिति को देखते हुए सऊदी के नागरिक सुरक्षा विभाग ने मक्का, जेद्दा और तैफ समेत कई शहरों में हाई अलर्ट जारी किया था। 2017 के बाद यह पहला मौका था जब मक्का में सुरक्षा को लेकर इस तरह की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, स्थिति सामान्य होते ही कुछ समय बाद इस चेतावनी को वापस ले लिया गया।
ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (OIC) ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। ओआईसी ने कहा है कि मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को निशाना बनाना न केवल आतंकवाद है, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश है। ओआईसी ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया है।
मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र केंद्र है, जहां काबा स्थित है। पूरी दुनिया के मुसलमान इसी दिशा में रुख करके नमाज अदा करते हैं। हज यात्रा के दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। यही कारण है कि मक्का की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक या हमले की खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव पैदा कर देती है।
वर्तमान में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच चल रहे इस विवाद ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है।
A warning has been issued by the National Early Warning Platform in Mecca City to alert of a potential danger. Please follow the instructions below: pic.twitter.com/IwvWhhKMan
— الدفاع المدني السعودي (@SaudiDCD) September 15, 2026
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