गलवान विवाद के बाद लंबे समय से ठंडे पड़े भारत और चीन के संबंधों में अब नई गर्माहट देखने को मिल रही है। दोनों देशों ने यह समझ लिया है कि सीमा विवाद अपनी जगह है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर एक-दूसरे का साथ न देना दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।
शी जिनपिंग-मोदी मुलाकात का असर ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद संबंधों में बदलाव के संकेत मिले हैं। जिनपिंग के भारत से लौटते ही दोनों देशों ने व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। सोमवार को दिल्ली में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ के बीच हुई अहम बैठक इसी दिशा में एक बड़ा पड़ाव है।
संतुलित व्यापार पर जोर चीन का रुख अब पहले की तुलना में अधिक लचीला दिखाई दे रहा है। चीनी दूतावास के अनुसार, दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं का समाधान संतुलित तरीके से होना चाहिए। भारत और चीन ने एक-दूसरे का साझेदार बनकर आगे बढ़ने की मंशा जताई है, जो कि व्यापारिक तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
ट्रेड डेफिसिट है बड़ी चुनौती भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता व्यापार घाटा है। 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 127.7 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात सिर्फ 19.47 अरब डॉलर था, जबकि आयात बढ़कर 131.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यानी भारत का व्यापार घाटा लगभग 99.19 अरब डॉलर है। भारत अब केवल सामान खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी कंपनियों के लिए चीनी बाजार में जगह चाहता है।
फार्मा और कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं भारत ने चीन के सामने अपनी निर्यात क्षमताओं को स्पष्ट कर दिया है।
क्या है भारत की रणनीति? भारत का लक्ष्य सिर्फ आयात पर निर्भर रहना नहीं है। सरकार चाहती है कि चीन से मिलने वाले आवश्यक कच्चे माल, सोलर उपकरण और मशीनरी की आपूर्ति बनी रहे, लेकिन साथ ही भारतीय उत्पादों को भी चीनी बाजार में समान अवसर मिले। हालांकि, भारत को सतर्क भी रहना होगा कि चीनी सामानों की बाढ़ से घरेलू उद्योग प्रभावित न हों। आने वाला समय बताएगा कि चीन अपने वादों पर कितना खरा उतरता है और व्यापारिक संतुलन किस हद तक बन पाता है।
China s Minister of Commerce Wang Wentao met with Indian Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal in Delhi.
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) September 14, 2026
India is an important neighbor of China. China stands ready to work with India to implement the important consensus reached by the leaders of the two countries,… pic.twitter.com/2oLJweWLoD
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