राजस्थान निकाय चुनाव 2026: क्या शहरी नतीजों से बदल पाएगी पंचायत चुनावों की दिशा?
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राजस्थान निकाय चुनावों के परिणाम बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए एक नया सियासी संदेश लेकर आए हैं। भले ही बीजेपी ने वार्डों की संख्या में बढ़त बनाई है, लेकिन कांग्रेस का बढ़ता वोट शेयर सत्ताधारी दल के लिए चिंता का सबब बन गया है।

आंकड़ों की बाजीगरी: बीजेपी आगे, पर कांग्रेस उत्साहित

राज्य के 309 निकायों के 10,245 वार्डों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस 3,613 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर है। निर्दलीय और अन्य के खाते में 2,443 वार्ड गए हैं। हालांकि, सीटों के इस अंतर के बीच कांग्रेस का दावा है कि उनका वोट शेयर 31.51% से बढ़कर 34.25% हो गया है, जबकि बीजेपी का वोट शेयर 39.63% से घटकर 35.19% पर आ गया है।

बड़े निगमों में फंसी बीजेपी की डगर

प्रदेश के 10 निगमों में बीजेपी केवल चार (जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा) में ही स्पष्ट पकड़ बना पाई है। बीकानेर जैसे प्रमुख निगम में कांग्रेस की जीत ने बीजेपी को झटका दिया है। वहीं, अजमेर, पाली, भरतपुर, अलवर और जोधपुर में त्रिशंकु स्थिति है, जहाँ निर्दलीय उम्मीदवार किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं। जोधपुर में तो दोनों मुख्य पार्टियां 44-44 सीटों पर बराबरी पर खड़ी हैं।

21 सितंबर को होगा बोर्ड गठन का फैसला

फिलहाल 145 निकायों में स्थिति साफ नहीं है। इनमें 5 नगर निगम, 18 नगर परिषदें और 122 नगर पालिकाएं शामिल हैं। निर्दलीयों को अपने पाले में लेने की होड़ दोनों दलों में तेज है। 21 सितंबर को होने वाला निकायों का चुनाव ही यह तय करेगा कि वास्तव में किस दल का बोर्ड ज्यादा संख्या में बन पा रहा है।

अब पंचायत चुनावों पर नजरें

निकाय चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस में नई ऊर्जा फूँक दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यदि शहरी इलाकों का यह ट्रेंड पंचायत चुनावों में भी जारी रहा, तो सत्ता का समीकरण बदल सकता है। राज्य में 14,403 ग्राम पंचायतें हैं और पंचायत चुनावों में वोटर्स की संख्या सवा चार करोड़ से अधिक है।

क्या ग्रामीण इलाका बदलेगा तस्वीर?

राजस्थान में परंपरागत रूप से शहरी क्षेत्रों में बीजेपी और ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस का दबदबा माना जाता है। परिसीमन के बाद बढ़ी हुई ग्राम पंचायतों (14,403) और 41 जिला परिषदों के चुनाव अब राज्य की असली सियासी परीक्षा होंगे। फिलहाल, चुनाव आयोग ने पंचायत चुनावों से जुड़ी लॉटरी प्रक्रिया को टाल दिया है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।

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