भाभीजी घर पर हैं फेम अभिनेता सानंद वर्मा और मुनिपुंगवश्री सुधा सागरजी महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में सानंद वर्मा ने जैन धर्म में प्याज, लहसुन और जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियों के निषेध पर सवाल किया है।
क्या है महाराज का तर्क? सवाल के जवाब में महाराज ने एक दिलचस्प व्याख्या दी। उन्होंने कहा कि जमीन के नीचे उगने वाली चीजें अंधेरे और नमी में रहती हैं, जबकि ऊपर उगने वाली सब्जियां सूर्य के प्रकाश और हवा के संपर्क में रहती हैं।
महाराज के अनुसार, जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियों का संबंध शारीरिक शक्ति से है, जबकि ऊपर उगने वाली चीजों का सेवन बुद्धि के विकास में सहायक माना जाता है। हालांकि, यह उनकी व्यक्तिगत व्याख्या है।
सूक्ष्मजीवों की रक्षा और अहिंसा महाराज ने इस परहेज के पीछे के आध्यात्मिक और धार्मिक कारण को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि जब जड़ वाली सब्जियों को जमीन से निकाला जाता है, तो मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों को भारी नुकसान पहुंचता है।
अहिंसा पर आधारित जैन धर्म में किसी भी जीव को अनावश्यक नुकसान पहुंचाना वर्जित है। इसलिए, इन सब्जियों को उखाड़ने से होने वाली संभावित हिंसा से बचने के लिए जैन परंपरा में इन्हें खाने से परहेज किया जाता है।
आध्यात्मिक साधना और आहार का संबंध जैन धर्म में खान-पान केवल स्वाद का विषय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का हिस्सा है। जैन मान्यताओं के अनुसार, आहार का सीधा असर मन और इंद्रियों पर पड़ता है।
जैन समुदाय में अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करते हुए ऐसे खाद्य पदार्थों को चुना जाता है, जिनसे जीवों को न्यूनतम क्षति पहुंचे। यही कारण है कि आलू, प्याज, लहसुन, गाजर और मूली जैसी कंद वाली सब्जियों को जैन रसोई से दूर रखा जाता है।
निष्कर्ष सानंद वर्मा और महाराज के बीच हुई यह बातचीत जैन जीवनशैली के उन पहलुओं को उजागर करती है, जो सदियों से उनकी आध्यात्मिक नींव का हिस्सा रहे हैं। यह वीडियो व्यापक रूप से जैन धर्म के अहिंसक जीवन दर्शन को समझाने का एक माध्यम बन गया है।
जैन समाज आलू, प्याज, लहसुन क्यों नहीं खाता इसका कारण जान लो मित्रों;
— 𝚂𝚑𝚒𝚟𝚊 📿 (@ShivainSaffron) September 7, 2026
लहसुन और प्याज के इतने सारे स्वास्थ्य लाभ होने के बावजूद, जैन समुदाय इनका सेवन क्यों नहीं करता.?
समस्त सुधा सागर जी ने बताया इसका साइकोलॉजिकल कारण.!! pic.twitter.com/0JMoXiHIfL
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