EPF का दायरा बढ़ा: अब 25,000 रुपये तक वेतन पाने वालों को मिलेगा PF, पेंशन और बीमा का सुरक्षा कवच
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केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा वर्ग के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इस बदलाव से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे।

क्या बदला है? अब तक, जिन कर्मचारियों का मूल वेतन (Basic Salary) 15,000 रुपये तक था, उनके लिए EPF अनिवार्य था। इस सीमा से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी अनिवार्य कवरेज से बाहर रह जाते थे। अब 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी अब कानूनी रूप से PF और पेंशन के दायरे में होंगे।

मिलेंगे ये तीन बड़े फायदे यह बदलाव सिर्फ PF (भविष्य निधि) तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में आने वाले कर्मचारियों को तीन मुख्य सुरक्षा लाभ मिलेंगे:

  1. EPF: रिटायरमेंट के लिए बचत का एक सुरक्षित जरिया।
  2. EPS (पेंशन): कर्मचारी पेंशन योजना के तहत बुढ़ापे में पेंशन की सुरक्षा।
  3. EDLI (बीमा): कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना के तहत परिवार को बीमा कवर।

सरकार पर पड़ेगा 11,339 करोड़ का सालाना बोझ इस फैसले के लागू होने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक, सरकार को इसके लिए सालाना लगभग 11,339 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। अगले पांच वर्षों में यह खर्च बढ़कर 56,696 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि यह निवेश देश के औपचारिक रोजगार क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाएगा।

क्यों अहम है यह बदलाव? EPFO भारत की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा संस्था है, जिसके साथ वर्तमान में लगभग 7.98 करोड़ सदस्य जुड़े हैं। 7.68 लाख से ज्यादा प्रतिष्ठान इसमें योगदान दे रहे हैं। पहले जो कर्मचारी 15,000 से 25,000 रुपये के बीच वेतन पाते थे, वे अक्सर स्वैच्छिक योगदान के अभाव में सामाजिक सुरक्षा से वंचित रह जाते थे। अब वे अनिवार्य रूप से इस व्यवस्था का हिस्सा होंगे, जिससे उनके भविष्य की आर्थिक नींव और अधिक सुरक्षित होगी।

औपचारिक अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा सरकार की इस पहल का मकसद संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इस कदम से न केवल कर्मचारियों को रिटायरमेंट की चिंता से राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें विपरीत परिस्थितियों में बीमा और पेंशन का सहारा भी मिलेगा। यह बदलाव औपचारिक नौकरियों को अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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