अमित शाह के UCC दांव पर नीतीश की ना , बिहार में एनडीए के भीतर ही ठन गई!
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का बड़ा ऐलान किया है। हालांकि, इस फैसले को लेकर बिहार में एनडीए के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में यूसीसी लागू नहीं होगा।

क्या है जेडीयू का स्टैंड? जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक श्याम रजक ने इस मामले पर पार्टी की स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा, जब यूसीसी बिल आया था, तब हमने इसका समर्थन जरूर किया था, लेकिन हमारे नेता नीतीश कुमार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इसे बिहार में लागू नहीं किया जाएगा। हम आज भी अपने स्टैंड पर कायम हैं।

बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश हालांकि, मतभेदों के बीच जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान इस विषय पर चर्चा के लिए जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेगा। इससे यह संकेत मिलता है कि जेडीयू मामला सुलझाने की कोशिश में है, लेकिन अपनी नीतिगत स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

अमित शाह का संकल्प और बीजेपी का एजेंडा मुंबई में मीडिया से बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि बीजेपी का संकल्प है कि 2029 तक सभी 21 बीजेपी शासित राज्यों में यूसीसी लागू हो। उन्होंने तीन तलाक खत्म करने और अनुच्छेद 370 हटाने का जिक्र करते हुए इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। बीजेपी अपनी चुनावी घोषणा के अनुरूप शादी, तलाक और विरासत के मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

यूसीसी की वर्तमान स्थिति समान नागरिक संहिता पर देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग स्थिति है:

आदिवासियों को छूट का प्रावधान सरकार ने यूसीसी के दायरे में आदिवासी समूहों को विशेष छूट दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनकी जातीय रीति-रिवाज, परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।

विपक्ष का तीखा हमला यूसीसी पर अमित शाह के बयान पर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा, ऐसे दांव खेलने के बाद भी अमित शाह प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे। कुल मिलाकर, यूसीसी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है, जहां एक तरफ बीजेपी इसे अपना मुख्य चुनावी वादा मानकर चल रही है, वहीं बिहार जैसे राज्यों में इसके कार्यान्वयन को लेकर बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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