भारतीय सेना के साहसी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में पूरी तरह ध्वस्त किए गए आतंकी ठिकाने एक बार फिर से खड़े किए जा रहे हैं। सामने आई नई एक्सक्लूसिव तस्वीरों और वीडियो ने पाकिस्तान की नापाक साजिशों का पर्दाफाश कर दिया है।
इन ठिकानों पर फिर से चल रहा निर्माण खुलासा हुआ है कि बहावलपुर, सवाई नाला और मुज़फ़्फ़राबाद में आतंकी संगठनों के लॉन्च पैड्स और ट्रेनिंग कैंपों का पुनर्निर्माण तेजी से चल रहा है। लश्कर-ए-तैयबा के सवाई नाला कैंप, जो कभी आतंकियों का गढ़ था और ऑपरेशन सिंदूर में मलबे में तब्दील हो गया था, वहां अब फिर से नई दीवारों और ईंटों का काम देखा जा सकता है।
जैश के केंद्रों में भी हलचल मुज़फ़्फ़राबाद में स्थित जैश-ए-मोहम्मद का सैदा बिलाल कैंप भी फिर से सक्रिय हो गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया था, लेकिन हालिया सबूतों से साफ है कि पाकिस्तान इन आतंकी ढांचे को फिर से पुनर्जीवित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
भारत का रुख: अब आतंकी कहीं भी सुरक्षित नहीं रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। इनके दोबारा अस्तित्व में आने का मतलब है कि पाकिस्तान आतंकी ढांचे को बचाने की अपनी पुरानी नीति पर आज भी कायम है।
जनरल नरवणे का बड़ा बयान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने हाल ही में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सुरक्षा नीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब भारत सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि सीमा पार मौजूद आतंकियों और उनके समर्थकों तक को निशाना बनाने में सक्षम है।
रणनीतिक बदलाव: सीमा के पार प्रहार जनरल नरवणे के अनुसार, पहले भारत की जवाबी कार्रवाई उरी या पुलवामा जैसी घटनाओं के बाद केवल सीमा तक सीमित रहती थी, लेकिन अब रणनीति बदल चुकी है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत की सैन्य कार्रवाई का दायरा अब उन आकाओं तक पहुंच गया है जो इन हमलों की साजिश रचते हैं।
पाकिस्तान की ये गतिविधियां साफ इशारा करती हैं कि वह अपनी जमीन से आतंकवाद को खत्म करने के बजाय इसे फिर से पोसने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञ इसे क्षेत्र में शांति के लिए एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं।
In its annual report 2025-26, the Ministry of Defence highlights the Situation along the Northern Front.
— ANI (@ANI) September 14, 2026
Overall Situation: The year 2025 witnessed a significant reduction in the deployment of People’s Liberation Army (PLA) Forces opposite the Northern Borders, with 10 Combined… pic.twitter.com/zm12fIlMuQ
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