मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक विचलित करने वाला वीडियो सामने आया है। आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत के बीच सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने पेयजल व्यवस्था और सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नल से निकला दूषित पानी वीडियो में एक सरकारी नल से मटमैले और भूरे रंग का पानी निकलता साफ देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उन्हीं आदिवासी गांवों का है, जहां हाल ही में 30 से अधिक बच्चों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई है। हालांकि, इस वीडियो की जगह और समय की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
नेताओं ने सरकार से पूछा तीखा सवाल CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि क्या मंत्री और विधायक अपने बच्चों को ऐसा दूषित पानी पिलाने का साहस करेंगे? इस बयान के बाद पेयजल की गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बहस तेज हो गई है।
मौतों और पानी का क्या है कनेक्शन? बालाघाट में बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस मामले में सरकार से जवाब तलब किया है। रिपोर्टों के अनुसार, मौतें कुपोषण, खसरा, मलेरिया, एनीमिया और सांस संबंधी जटिलताओं के कारण हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंदा पानी दस्त, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियों को न्योता देता है। यदि बच्चे पहले से ही कुपोषित या कमजोर हैं, तो दूषित पानी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। हालांकि, अभी तक किसी भी आधिकारिक जांच ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन मौतों का सीधा संबंध सीधे तौर पर इसी वायरल पानी से है।
राजनीतिक खींचतान और हकीकत घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे अभिजीत दीपके का कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध भी किया गया, जिसे लेकर विवाद की स्थिति बनी है। वहीं, दूसरी ओर कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें पीड़ित परिवारों तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की गई।
फिलहाल, प्रशासनिक अमले ने चुप्पी साध रखी है। अब सबकी निगाहें पानी के नमूनों की लैब रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह जांच ही तय करेगी कि क्या जल-संकट वास्तव में इस त्रासदी की जड़ है, या फिर यह अव्यवस्थाओं के अंबार का मात्र एक छोटा सा हिस्सा है। जब तक अधिकृत रिपोर्ट नहीं आती, इन दावों को पूरी तरह प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
*Found tap water in one of the Tribal villages in Balaghat where more than 30 kids have died.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 13, 2026
Would the Ministers and MLAs make their own children drink this water? pic.twitter.com/okDvm15IIH
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