मलेशियाई PM के बयान पर बिलावल भुट्टो का विवादित प्रलाप: भारत के खिलाफ उगला जहर
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पीपीपी चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के हालिया इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मलेशियाई PM के बयान का क्या है पेंच? हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में आतंकवाद को लेकर सवाल पूछा गया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पाकिस्तान को लेकर भी वही कड़ा रुख अपनाते हैं, तो इब्राहिम ने संतुलित जवाब दिया।

अनवर इब्राहिम ने कहा कि जब तक उनकी खुफिया एजेंसियां उन्हें स्पष्ट सबूत नहीं देतीं, वे पाकिस्तान पर स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद का आरोप नहीं लगा सकते। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में यह मामला बेहद संवेदनशील है और वे प्रधानमंत्री मोदी के करीबी दोस्त हैं।

बिलावल का प्रोपेगैंडा वाला बयान मलेशियाई PM के इसी तटस्थ रुख को बिलावल भुट्टो ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। बिलावल ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि मलेशियाई PM ने भारतीय टीवी पर भारत के प्रोपेगैंडा की पोल खोल दी है।

बिलावल ने बेबुनियाद दावा करते हुए कहा कि भारत ने झूठ के आधार पर युद्ध शुरू किया और बुरी तरह हार गया। उन्होंने पिछले साल हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र करते हुए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब होने की बात कही।

क्या हुआ था पिछले साल? बिलावल का यह बयान पिछले साल अप्रैल में हुई घटनाओं के बाद आया है। पहलगाम में पर्यटकों की निर्मम हत्या के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था।

भारत की इस जवाबी कार्रवाई में पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया था। उस दौरान भारतीय वायुसेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी वायुसेना के 11 एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसे बिलावल ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की है।

पाकिस्तान की पुरानी रणनीति? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिलावल भुट्टो का यह बयान पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन पाने का एक प्रयास है। वे अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ जहर उगलकर अपनी कट्टरपंथी छवि को भुनाने की कोशिश करते हैं।

भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद और बातचीत को साथ लेकर नहीं चल सकता। बिलावल की ओर से शांति और स्थिरता की बातें करना इसे केवल एक दिखावा माना जा रहा है, जबकि असलियत में वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब करने की नाकाम कोशिश में जुटे हैं।

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