लद्दाख की प्रसिद्ध त्सो कार झील अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। पिछले एक दशक में यह झील 70% तक सिकुड़ चुकी है। अब इसे बचाने के लिए उपराज्यपाल वीके सक्सेना के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
बेकार बहते पानी का बेहतर इस्तेमाल इस परियोजना के केंद्र में वेस्ट पानी का प्रबंधन है। वर्तमान में, रूपशो खर्नक ग्लेशियर से निकलने वाला लाखों लीटर पानी बिना किसी उपयोग के सिंधु नदी में जाकर बर्बाद हो जाता है। नई योजना के तहत, इस पानी को 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित त्सो कार झील तक पहुँचाया जाएगा। इससे प्रतिदिन लगभग 320 मिलियन लीटर पानी झील को रिचार्ज करने के काम आएगा।
क्या है त्सो कार की स्थिति? त्सो कार लद्दाख की सबसे प्रतिष्ठित झीलों में से एक रही है। एक समय में यह 11,000 एकड़ में फैली थी, लेकिन वर्तमान में यह सिमटकर महज 3,200 एकड़ रह गई है। पानी की कमी के कारण इस झील ने अपने उन प्रवासी पक्षियों को भी खो दिया है, जिनमें मशहूर ब्लैक-नेक्ड क्रेन शामिल थे।
प्राकृतिक ढलान और चेक डैम का कमाल यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण है। रूपशो खर्नक धारा से पानी को झील तक लाने के लिए प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण (Gravity flow) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस रास्ते में आने वाले तीन प्राकृतिक गड्ढों (डिप्रेशन) का उपयोग जल भंडार के रूप में होगा। प्रत्येक गड्ढे के आउटलेट पर RCC पाइप वाले चेक डैम बनाए जा रहे हैं ताकि पानी के बहाव को नियंत्रित कर झील में सही मात्रा में पानी पहुँचाया जा सके।
बदल रही परिस्थितियाँ, जगी उम्मीद 11 किलोमीटर लंबी इस जल-आपूर्ति प्रणाली का विचार उपराज्यपाल को अगस्त में स्थानीय ग्रामीणों से मिलने के बाद आया था। शून्य से नीचे के तापमान और कठिन भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद, यह भारत का अपनी तरह का पहला उच्च-ऊंचाई वाला पारिस्थितिकी बहाली प्रोजेक्ट है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रही, तो एक साल के भीतर त्सो कार झील अपनी पुरानी भव्यता हासिल कर लेगी और प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट फिर से सुनाई देगी।
Glad to share a mammoth exercise we have undertaken to revive the majestic glacial lake – Tso Kar in Ladakh, using the pioneering glacier water integration, making it the first-of-its-kind high-altitude ecological restoration project in India.
— LG Ladakh (@lg_ladakh) September 13, 2026
Utilizing natural gravity flow and… pic.twitter.com/6TSQHSIF4X
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