नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक धमक को साबित किया है। लेकिन, बड़े फैसलों और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के बजाय सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र डिनर मेनू बन गया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित गाला डिनर में परोसे गए विशुद्ध शाकाहारी भोजन ने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी का छोले-भटूरे वाला दांव कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर छोले-भटूरे की फोटो पोस्ट करते हुए तंज कसा। उन्होंने लिखा कि भारत में 80% लोग मांसाहारी हैं और देश का नॉनवेज खाना स्वादिष्ट होता है। विपक्ष का यह कदम यह दिखाने की कोशिश थी कि सरकार सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को थोप रही है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि विपक्ष के पास सरकार की कूटनीतिक सफलता पर घेरने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए वे मेनू तक सिमट कर रह गए।
क्या शी जिनपिंग इसलिए नहीं आए? सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म रहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसलिए डिनर में शामिल नहीं हुए क्योंकि वहां नॉनवेज विकल्प नहीं थे। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। वास्तविकता यह है कि लगातार व्यस्त शेड्यूल, लंबी यात्रा और पीएम मोदी के साथ लंबी द्विपक्षीय बैठक के बाद जिनपिंग काफी थक चुके थे, इसी कारण उन्होंने रात्रि भोज में न जाने का फैसला किया।
कोई नई बात नहीं है शाकाहारी भोज BRICS का यह मेनू अचानक नहीं आया है। पिछले कुछ समय से भारत के आधिकारिक आयोजनों में शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता दी जा रही है। 2023 के G20 शिखर सम्मेलन से लेकर वियतनामी राष्ट्रपति के भोज तक, सभी में शाकाहारी व्यंजन परोसे गए हैं। यह किसी सख्त नीति के बजाय बाजरा (मिलेट्स) को बढ़ावा देने और थीम-आधारित आयोजन का हिस्सा है।
वैश्विक स्तर पर भी है यह ट्रेंड शाकाहारी भोजन को केवल भारत तक सीमित देखना गलत होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश क्लाइमेट पॉलिसी और स्वस्थ जीवनशैली को प्रमोट करने के लिए शाकाहारी मेनू अपना चुके हैं। वाइट हाउस और G7 सम्मेलनों में भी कई बार शाकाहारी भोज का आयोजन किया जा चुका है।
कूटनीति बनाम मेनू की राजनीति BRICS सम्मेलन में भारत ने ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत दिखाई। लेकिन, सोशल मीडिया और विपक्ष का सारा ध्यान पनीर लबाबदार और मशरूम गलोटी पर ही टिका रहा। यह स्पष्ट है कि कूटनीतिक सफलताओं के बीच खाने की राजनीति शोर मचाने का एक जरिया बनकर रह गई है, जबकि हकीकत में यह केवल मेजबान की पसंद और आयोजन की थीम पर आधारित एक सामान्य निर्णय था।
For the record: 80% of Indians are non-vegetarian.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 13, 2026
Indian non-vegetarian food is delicious. As are my sister s chole bhature. pic.twitter.com/8f6ziKjLan
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