मोदी की तेरहवीं मनाने वाली नीशू आजाद का बड़ा खुलासा, बताया क्यों दस्तावेजों में आज भी हैं हिंदू!
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सोशल मीडिया पर चर्चाओं में रहने वाली नीशू आजाद ने अपनी धार्मिक पहचान को लेकर चुप्पी तोड़ी है। एक हालिया इंटरव्यू में उनसे उनकी आस्था को लेकर सीधा सवाल किया गया, जिस पर उन्होंने खुलकर बात की।

दस्तावेजों में हिंदू, मन से बौद्ध नीशू ने स्पष्ट किया कि सरकारी दस्तावेजों में वह अभी भी हिंदू ही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि निजी जीवन में उनकी आस्था हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों में नहीं है। उन्होंने कहा कि वह बौद्ध धर्म की परंपराओं और विचारों का पालन करती हैं।

बदलाव के पीछे बाबा साहेब का प्रभाव अपनी सोच में आए बदलाव पर नीशू ने कहा कि करीब चार साल पहले उन्होंने हिंदू मान्यताओं को मानना बंद कर दिया था। इस बदलाव के पीछे बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं और उनके विचार सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं।

पेरियार और फुले का भी असर नीशू के अनुसार, उन्होंने केवल आंबेडकर ही नहीं, बल्कि पेरियार और महात्मा ज्योतिबा फुले के साहित्य को भी गहराई से पढ़ा है। इन विचारकों को पढ़ने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी पिछली धार्मिक मान्यताएं इन महापुरुषों के सिद्धांतों से मेल नहीं खाती थीं, जिसके बाद उन्होंने अपनी विचारधारा बदल ली।

जल्द औपचारिक रूप से अपनाएंगी धर्म इंटरव्यू के दौरान उन्होंने यह भी माना कि उनका पूरा परिवार बौद्ध धर्म के विचारों को मानता है। उन्होंने कहा कि वह और उनका परिवार जल्द ही औपचारिक रूप से बौद्ध धर्म अपनाने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। हालांकि, इसके लिए वह थोड़ा समय ले रही हैं ताकि धर्म परिवर्तन के हर पहलू को गहराई से समझा जा सके।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस नीशू का यह बयान सामने आते ही इंटरनेट पर नई बहस छिड़ गई है। लोग उनके इस दोहरे रुख पर सवाल उठा रहे हैं कि यदि वह बौद्ध धर्म को मानती हैं, तो दस्तावेजों में हिंदू होने का लाभ क्यों ले रही हैं। बहरहाल, नीशू ने अपनी व्यक्तिगत आस्था और प्रशासनिक पहचान के बीच का अंतर स्पष्ट कर दिया है।

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