BRICS में पुतिन की AI सेल्फी : क्या यह अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक वॉर्निंग है?
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हाल ही में हुए ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के दौरान सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने साथी नेताओं—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के मसूद पेजेशकियान के साथ सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं।

हालांकि, यह तस्वीर वास्तविक नहीं है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है। आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई सेल्फी नहीं ली गई है, लेकिन इसके बावजूद यह इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

एकजुटता या अमेरिका को चुनौती? तस्वीर असली न होने के बावजूद, इसके पीछे के संदेश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जानकार इसे ब्रिक्स देशों की बढ़ती एकजुटता और उनके बढ़ते वैश्विक प्रभाव के रूप में देख रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह तस्वीर अमेरिका को एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश है कि ब्रिक्स देश अब अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए पश्चिमी देशों के दबाव से मुक्त होकर एक स्वतंत्र रुख अपना रहे हैं। यह सुपरपावर के एकाधिकार को चुनौती देने जैसा है।

अमेरिका-ब्रिक्स के बीच बढ़ती तल्खी ब्रिक्स और अमेरिका के बीच व्यापारिक और रणनीतिक तनाव जगजाहिर है। रूस और ईरान पर अमेरिका ने पहले ही कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं, जबकि भारत और चीन के साथ भी व्यापारिक नीतियों और टैरिफ को लेकर असहमति बनी रहती है।

ब्रिक्स के विस्तार के साथ ही यह समूह अब पश्चिमी देशों के प्रभाव से इतर एक मजबूत आर्थिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। यह संगठन डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी शर्तों पर वैश्विक व्यापार को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

क्या ब्रिक्स ला रहा है अपनी मुद्रा? लंबे समय से यह चर्चा जोरों पर है कि क्या ब्रिक्स अपनी कोई साझा करेंसी (मुद्रा) लाने वाला है। फिलहाल, सच्चाई यह है कि अभी ऐसी कोई आधिकारिक मुद्रा लॉन्च नहीं हुई है।

ब्रिक्स का मौजूदा फोकस डी-डॉलराइजेशन पर है, यानी वे आपसी व्यापार को अपनी स्थानीय मुद्राओं में करने और भुगतान व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसे पूरी तरह साझा करेंसी न मानकर, डॉलर के दबदबे को कम करने की एक सोची-समझी आर्थिक रणनीति माना जा सकता है।

समस्याओं के समाधान का मंच: पीएम मोदी सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को वैश्विक समस्याओं के समाधान का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की।

नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में पीएम मोदी की विभिन्न वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भारत की सक्रिय और संतुलित कूटनीति को भी दर्शाती हैं। जहां एक ओर दुनिया दो ध्रुवों में बंटती दिख रही है, वहीं भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

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