क्या ईरानी राष्ट्रपति ने छुए हिंदू धर्मगुरु के पैर? वायरल वीडियो का नो-फिल्टर सच
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दिल्ली में एक हिंदू धर्मगुरु के पैर छुए। इस वीडियो ने इंटरनेट पर खूब चर्चा बटोरी, लेकिन हकीकत दावों से बिल्कुल उलट निकली।

क्या है वायरल वीडियो का सच? वीडियो में दिख रहा है कि मसूद पेजेशकियान एक कार्यक्रम के दौरान झुकते हैं, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स चरण स्पर्श बताकर शेयर कर रहे हैं। हालांकि, ईरान दूतावास ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ने किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं किया, बल्कि वे जमीन पर गिरे एक पत्र या दस्तावेज को उठाने के लिए झुके थे।

गलत संदर्भ में पेश की गई क्लिप दूतावास के सूत्रों का कहना है कि वायरल वीडियो को गलत एंगल से एडिट और क्लिप किया गया है। इसे जानबूझकर एक सांस्कृतिक सम्मान के रूप में पेश किया गया ताकि भ्रम फैलाया जा सके। असल में यह घटनाक्रम महज एक दस्तावेज उठाने की प्रक्रिया थी, जिसे तोड़-मरोड़कर वायरल किया गया।

ओबेरॉय होटल में हुआ था आयोजन यह घटना नई दिल्ली के ओबेरॉय होटल की है। यहां ब्रिक्स समिट के दौरान ईरान की ओर से एक विशेष संवाद कार्यक्रम रखा गया था। इस कार्यक्रम में जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज के अलावा कश्मीरी शिया धर्मगुरु आगा सैयद हसन मोसावी अल सफवी, मीरवाइज उमर फारूक, इमरान रजा अंसारी और जैन मुनि आचार्य लोकेश मुनि समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

सांस्कृतिक कूटनीति थी मकसद इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत और ईरान के बीच पीपल-टू-पीपल डिप्लोमेसी और सांस्कृतिक सौहार्द को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में सनातन धर्म के आध्यात्मिक संदेश और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर चर्चा की गई। लेकिन इस सार्थक चर्चा के बजाय, सोशल मीडिया पर वीडियो की क्लिप ने मामले को विवादित बना दिया।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न: क्या ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दिल्ली में हिंदू धर्मगुरु के पैर छुए? उत्तर: नहीं, यह दावा गलत है। ईरानी दूतावास के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति केवल जमीन पर गिरे एक दस्तावेज को उठाने के लिए झुके थे।

प्रश्न: यह वायरल वीडियो किस कार्यक्रम का है? उत्तर: यह वीडियो नई दिल्ली के ओबेरॉय होटल का है, जहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान की सांस्कृतिक कूटनीति के तहत भारतीय धार्मिक नेताओं के साथ एक संवाद आयोजित किया गया था।

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