ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: मायावती का बड़ा बयान, दिल्ली घोषणापत्र को बताया कूटनीतिक जीत
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नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ब्रिक्स देशों द्वारा जारी दिल्ली घोषणापत्र को मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि करार दिया है।

कूटनीतिक सफलता और आर्थिक उम्मीदें

मायावती ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, युद्ध और आर्थिक संकटों के दौर में 140 पैराग्राफ वाले साझा घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति बनना आपसी समझ का बड़ा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई मजबूती देने की इच्छा भविष्य के लिए एक नई उम्मीद जगाती है।

साझा मुद्रा पर सकारात्मक रुख

ब्रिक्स देशों के बीच साझा मुद्रा (BRICS Currency) को लेकर हो रही चर्चा पर मायावती ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सदस्य देश आपसी व्यापार के लिए साझा मुद्रा का उपयोग करते हैं, तो इससे आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी और सदस्य देशों की निर्भरता और सशक्त होगी।

फिलिस्तीन और आतंकवाद पर भारत का समर्थन

फिलिस्तीन के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र के समर्थन में भारत के दृष्टिकोण का ब्रिक्स मंच पर स्वीकार किया जाना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का समर्थन करते हुए पहलगाम हमले का जिक्र किया और कहा कि आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने के लिए वैश्विक प्रतिबद्धता अनिवार्य है।

चीन-भारत संबंधों पर सुझाव

चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों पर मायावती ने संतुलन बनाने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और चीन को अपने मतभेदों को विवाद में तब्दील होने से रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश एक-दूसरे को विकास के साझेदार के रूप में देखें, तो सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। साथ ही, उन्होंने सीमा विवाद के जल्द समाधान पर भी जोर दिया।

शिखर सम्मेलन का अंतिम चरण

गौरतलब है कि नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इस शिखर सम्मेलन का आज समापन दिन है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कीं, जिसमें कजाकिस्तान, मिस्र, युगांडा और बुरुंडी सहित कई प्रमुख देशों के नेता शामिल रहे। सम्मेलन का यह आयोजन भारत की बढ़ती वैश्विक साख के रूप में देखा जा रहा है।

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