ब्रिक्स समिट में भारत-चीन की साझा हुंकार, आतंकवाद पर घिरे पाकिस्तान के मंसूबों को करारा झटका
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ब्रिक्स समिट के बाद जारी नई दिल्ली घोषणा पत्र ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद की कमर तोड़ने का संकल्प लिया है। 45 पन्नों के इस ऐतिहासिक दस्तावेज में 140 बिंदुओं के जरिए आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। इस घोषणा पत्र में चीन का भारत के साथ आना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।

पहलगाम हमले पर सख्त रुख ब्रिक्स देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। घोषणा पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी सूरत में आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता, चाहे वह कहीं भी या किसी के भी द्वारा किया गया हो।

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस घोषणा पत्र में सदस्य देशों ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई है। इसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता और सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने पर जोर दिया गया है। भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग को समर्थन देते हुए ब्रिक्स ने आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड (Double Standards) को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

धर्म से आतंकवाद को अलग करने की मांग सदस्य देशों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही, युवाओं को कट्टरपंथ से दूर रखने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।

संगठित अपराधों पर कड़ा प्रहार आतंकवाद के अलावा, ब्रिक्स ने मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी, हथियारों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे संगठित अपराधों को वैश्विक चुनौती माना है। घोषणा पत्र में ऑनलाइन ठगी नेटवर्क को ध्वस्त करने और अपराध से अर्जित धन की वसूली के लिए सख्त तंत्र बनाने की बात कही गई है।

संयुक्त राष्ट्र की सूची पर जोर समिट में ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया है। यह कदम सीधे तौर पर उन देशों के लिए चेतावनी है जो अपनी सरजमीं का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए करते हैं।

यह संयुक्त घोषणा पत्र न केवल भारत की कूटनीतिक जीत है, बल्कि यह पाकिस्तान जैसे देशों के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि अब वैश्विक मंच पर आतंकवाद को किसी भी आधार पर संरक्षण नहीं मिलेगा।

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