खुद को MP का मुख्यमंत्री बताकर फंसे अभिजीत दीपके, व्यंग्यात्मक इस्तीफा पड़ा भारी
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सोशल मीडिया पर अक्सर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले अभिजीत दीपके इस बार एक बेहद अजीबोगरीब दांव खेलकर मुश्किल में फंस गए हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए एक इस्तीफा पत्र पोस्ट किया, जिसके बाद वे न केवल ट्रोल हो रहे हैं, बल्कि कानूनी विवादों में भी घिरते नजर आ रहे हैं।

व्यंग्य पड़ा भारी: आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल

अभिजीत दीपके ने अपने इस्तीफे के लिए एक ऐसे लेटरहेड का इस्तेमाल किया, जिसमें भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) का प्रयोग किया गया था। यह पत्र हूबहू असली आधिकारिक पत्र जैसा दिख रहा था। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए लिखा कि वे मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

राष्ट्रीय प्रतीक के दुरुपयोग पर भड़के लोग

इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने दीपके को निशाने पर ले लिया है। लोगों का कहना है कि व्यंग्य करने के चक्कर में उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान किया है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया है कि क्या किसी भी व्यक्ति को आधिकारिक पद का दिखावा करने और सरकारी प्रतीक चिन्हों का दुरुपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है? यूजर्स की मांग है कि पुलिस मामले का संज्ञान ले और उन पर कार्रवाई करे।

क्या है पूरा मामला और क्यों लिखा इस्तीफा?

यह सब तब शुरू हुआ जब दीपके बालाघाट के उन आदिवासी गांवों (अडोरी, कोरका और बोंडारी) में पहुंचे, जहां हाल ही में संक्रमण फैलने से कई बैगा आदिवासी बच्चों की मौत हुई थी। वहां मौजूद स्थानीय लोगों और कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने उनसे तीखे सवाल किए। उनसे पूछा गया कि वे यहां लाशों पर राजनीति करने क्यों आए हैं और इतनी देर से क्यों पहुंचे हैं।

बहस के बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं ने निकाला बाहर

विवाद के दौरान महिला इन्फ्लुएंसर ने जब उनसे विकास कार्यों और सड़कों को लेकर सवाल दागे, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दीपके के साथ आए सीजेपी (CJP) कार्यकर्ताओं ने उन्हें बीच-बचाव कर वहां से सुरक्षित निकाला। इसके बाद ही दीपके ने अपने एक्स अकाउंट पर तंज कसते हुए यह इस्तीफा जारी किया, जिसमें उन्होंने सागर शराब त्रासदी और बालाघाट में हुई मौतों के बहाने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर सीधा निशाना साधा था।

अब यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीक के गलत इस्तेमाल के कारण दीपके के लिए कानूनी चुनौती बन गया है। फिलहाल, न तो प्रशासन और न ही दीपके की ओर से इस पर कोई आधिकारिक सफाई सामने आई है।

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