दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कमर कस ली है। प्रदूषण के मुख्य कारकों, खासकर वाहनों से निकलने वाले धुएं पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बड़े बदलाव का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अब तक प्रदूषण जांच की प्रक्रिया में काफी खामियां थीं। व्यावसायिक वाहनों को पुरानी तकनीक वाले केंद्रों से फिटनेस प्रमाणपत्र मिल रहे थे, जबकि निजी वाहनों की जांच पेट्रोल पंपों के बाहर बने अनौपचारिक केंद्रों पर हो रही थी।
अब दिल्ली के सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर केंद्र पर कैमरे लगाए जाएंगे। इससे जांच प्रक्रिया की निगरानी होगी और फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लग सकेगी।
सरकार ने फिटनेस जांच को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए तेहखंड और नंद नगरी में दो अत्याधुनिक स्वचालित (Automated) जांच केंद्र शुरू किए हैं। प्रत्येक केंद्र में सालाना 72 हजार वाहनों की जांच करने की क्षमता है। इससे पुराने और व्यावसायिक वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर बेहतर नियंत्रण हो सकेगा।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संयुक्त समीक्षा के बाद 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट्स की पहचान की है। इन इलाकों की निगरानी के लिए सचिव स्तर के 13 वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।
हर हॉटस्पॉट के 3 किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण कम करने की विशेष योजना लागू होगी और इसकी साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। एलजी संधू ने स्पष्ट किया है कि विभागों के बीच बेहतर तालमेल ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।
प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन को अनिवार्य कर दिया गया है। दिल्ली मेट्रो को अपने निर्माण क्षेत्रों में पानी के छिड़काव और मशीनों से सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, शहर के 62 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया है जहाँ अक्सर ट्रैफिक जाम रहता है। जाम के कारण वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए सिग्नल व्यवस्था में सुधार, अतिक्रमण हटाने और पार्किंग प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़क की धूल, निर्माण, औद्योगिक उत्सर्जन और कचरा जलाने जैसी समस्याओं पर एक साथ प्रहार किए बिना दिल्ली की हवा को साफ नहीं किया जा सकता।
While working on solutions to pollution, we identified a major gap. Commercial vehicles were getting fitness certificates from centres using old technology, while private vehicles were getting pollution certificates from booths outside petrol pumps.
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 13, 2026
We decided to strengthen… pic.twitter.com/f0eA9MOt2s
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