ब्रिक्स घोषणा पर खुश हुए सलमान खुर्शीद: बोले- इसमें देश और दुनिया का हित, विरोध का कोई कारण नहीं
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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित नई दिल्ली घोषणा का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने इस दस्तावेज को वैश्विक सहमति का एक उत्कृष्ट उदाहरण करार दिया है।

आम सहमति ही सबसे बड़ी जीत खुर्शीद ने कहा कि यह सुखद है कि तमाम विवादास्पद और टकराव वाले मुद्दों के बावजूद सभी सदस्य देशों ने एक साझा बयान पर सहमति जताई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे दौर में जब दुनिया अलग-अलग ध्रुवों में बंटी है, ब्रिक्स देशों का एक साथ आना एक सकारात्मक कदम है।

आतंकवाद पर कड़ा रुख कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से घोषणा पत्र में आतंकवाद के खिलाफ अपनाए गए रुख की सराहना की। उन्होंने कहा, ब्रिक्स प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की घटना और सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई है। दुनिया को आतंकवाद-मुक्त बनाने का संकल्प निश्चित रूप से संतोषजनक है।

अहम मसलों पर स्पष्ट स्टैंड खुर्शीद ने प्रस्ताव की उन खूबियों को रेखांकित किया जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मायने रखती हैं। उन्होंने कहा कि घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना लगाए जाने वाली एकतरफा पाबंदियों को गलत माना गया है। साथ ही, गाजा के समर्थन और इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के समाधान के लिए टू-स्टेट सॉल्यूशन (दो-राज्य समाधान) पर जोर दिया गया है।

उन्होंने स्पष्ट कहा, इस साझा बयान में देश और दुनिया के हित की कई अहम बातें हैं, इसलिए इसका विरोध करने का कोई कारण नहीं दिखता।

पीएम मोदी और चीन के रिश्तों पर उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक पर टिप्पणी करते हुए खुर्शीद ने सतर्क आशावाद जताया। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय समझौतों को आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि अजीत डोभाल की चीन यात्रा और विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत के बाद यह बैठक संबंधों में सुधार और तनाव कम करने की दिशा में एक सफल कदम साबित होगी।

ब्रिक्स करेंसी की जटिलता हालांकि, ब्रिक्स की साझा मुद्रा (Currency) के सवाल पर खुर्शीद ने थोड़ी सावधानी बरती। उन्होंने कहा कि यह एक जटिल विषय है और इसमें अभी कई व्यावहारिक चुनौतियां बनी हुई हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उल्लेखनीय है कि शनिवार (12 सितंबर) को 18वें ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली घोषणा का प्रस्ताव रखा था, जिसे बिना किसी आपत्ति के सभी सदस्य देशों ने स्वीकार कर लिया।

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