ब्रिक्स से अचानक क्यों लौटे यूएई के क्राउन प्रिंस? क्या हूती हमलों ने बढ़ाई बेचैनी?
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अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच से ही अपने वतन लौट गए हैं। उनके अचानक प्रस्थान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि पश्चिम एशिया में हूती विद्रोहियों द्वारा तेज किए गए हमलों ने उन्हें तुरंत वापस लौटने पर मजबूर किया है।

ईरान के राष्ट्रपति से अहम मुलाकात ब्रिक्स समिट के दौरान क्राउन प्रिंस ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ एक हाई-लेवल बैठक की। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। बैठक के बाद शेख खालिद ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर चर्चा की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी द्विपक्षीय वार्ता की।

हूती हमलों से दहला ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर यूएई के लिए चिंता का मुख्य कारण हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार बढ़ते हमले हैं। इससे पहले भी ईरान समर्थित इन विद्रोहियों ने यूएई के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाहों और व्यावसायिक केंद्रों को बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। वहीं, सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन भी ड्रोन हमले के बाद बंद कर दी गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर खतरा बढ़ गया है।

समुद्री व्यापार पर मंडराया संकट क्षेत्रीय स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है। हूती विद्रोहियों ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ अल मंदेब और पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है। साथ ही, लाल सागर के प्रमुख बंदरगाह शहर मोखा पर भी उनका नियंत्रण हो गया है। अब विद्रोही यमन के ताइज शहर की ओर बढ़ रहे हैं।

यदि यह मार्ग बंद रहता है, तो यूरोप जाने वाले जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। हूतियों ने चेतावनी दी है कि वे सऊदी जहाजों को इस रास्ते से गुजरने नहीं देंगे।

ईरान और सऊदी अरब में गतिरोध तनाव को थामने के लिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को संदेश भेजा है कि वह हूतियों को हमले रोकने के लिए कहे। हालांकि, ईरान ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है कि उन विद्रोहियों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। फिलहाल, क्राउन प्रिंस की वापसी से साफ है कि खाड़ी देशों में सुरक्षा हालात अब एक नाजुक मोड़ पर हैं।

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