उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संभल जिला राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया है। शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद की घटनाओं ने इसे राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यह जिला पिछले वर्षों की तरह सपा का अभेद्य गढ़ बना रहेगा या भाजपा और ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) यहां समीकरण बदल देंगे?
संभल जिले की पहचान मुस्लिम बहुल जिले के रूप में होती है, जहां आबादी का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा मुस्लिम समुदाय से आता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की पांच में से चार सीटों (संभल, असमोली, बिलारी, गुन्नौर) पर समाजवादी पार्टी का एकतरफा कब्जा था। केवल चंदौसी (सुरक्षित) सीट ही भाजपा के खाते में गई थी। लंबे समय से यह क्षेत्र समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है, विशेषकर गुन्नौर सीट पर मुलायम सिंह यादव परिवार का गहरा प्रभाव है।
नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के अदालती सर्वे के दौरान हुई भीषण हिंसा ने जिले का राजनीतिक मिजाज बदल दिया है। इस हिंसा में पांच लोगों की मौत हुई थी और हाल ही में न्यायिक आयोग ने इसे पूर्व नियोजित साजिश करार दिया है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय सियासत में ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया है, जिसका असर 2027 के मतदान पर पड़ना तय माना जा रहा है।
संभल हिंसा के मुख्य आरोपियों में शामिल जामा मस्जिद प्रबंध कमेटी के एक सदस्य का असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में एआईएमआईएम में शामिल होना एक बड़ा संकेत है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि एआईएमआईएम चुनावी मैदान में उतरती है, तो सपा के पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक में बंटवारा हो सकता है। यह स्थिति भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
भाजपा जहां हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं सपा अपने पीडीए फॉर्मूले के जरिए पुराने जनाधार को बचाने की कोशिश में है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संभल हिंसा का असर ध्रुवीकरण के जरिए भाजपा को मजबूत करेगा या मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ ही खड़ा रहेगा।
Azamgarh, Uttar Pradesh: Deputy Chief Minister Brajesh Pathak says, The government has taken cognizance of the entire matter, and whoever is guilty will not be spared. Our government will definitely maintain law and order... We are fully prepared for 2027, and the Bharatiya… pic.twitter.com/jzaPMpM5C0
— IANS (@ians_india) September 11, 2026
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