मेरी गाड़ी मेरी ताकत है, घमंड नहीं : दमन कलेक्टर ने थार-फॉर्च्यूनर मालिकों को दिलाई शपथ, वायरल हुआ वीडियो
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सड़क पर थार और फॉर्च्यूनर का जलवा किसी से छिपा नहीं है। इन दमदार SUV को लेकर युवाओं में जितना क्रेज है, उतनी ही चिंताजनक तस्वीरें भी अक्सर सामने आती हैं। तेज रफ्तार और स्टंट के बढ़ते मामलों के बीच, दमन प्रशासन ने एक ऐसी पहल की है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।

कलेक्टर का अनूठा तरीका

दमन के कलेक्टर सौरभ मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह थार और फॉर्च्यूनर के मालिकों को सुरक्षित ड्राइविंग की शपथ दिलाते नजर आ रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में SUV की कतारें खड़ी थीं, जो इस पहल की गंभीरता को और बढ़ा रही थीं।

पोस्टर के जरिए सीधा संदेश

इस कार्यक्रम में शामिल लोगों के हाथों में पीले रंग के पोस्टर थे, जिन पर लिखे संदेशों ने सबका ध्यान खींचा। पोस्टर पर साफ लिखा था- भाईगिरी कूल नहीं है , रफ्तार नहीं संस्कार और मेरी गाड़ी मेरी ताकत है, घमंड नहीं । ये संदेश स्पष्ट संकेत देते हैं कि गाड़ी का दबदबा सड़क पर अनुशासन से ही माना जाना चाहिए।

महिंद्रा तक पहुंची बात

प्रशासन ने इस जागरूकता अभियान को महिंद्रा ग्रुप के मशहूर #TharKaMatlabZimmedari अभियान से जोड़ा है। सोशल मीडिया पर इस पहल की जानकारी देते हुए महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को भी टैग किया गया। कलेक्टर का संदेश साफ है: बड़ी गाड़ी चलाने का मतलब केवल स्टाइल मारना नहीं, बल्कि सड़क पर बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन करना भी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

यह वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोगों ने इसे एक सराहनीय कदम बताया, वहीं कई यूजर्स ने इसे लेकर तीखे सवाल भी किए।

एक यूजर ने टिप्पणी की, सुरक्षित ड्राइविंग का मतलब सिर्फ धीरे गाड़ी चलाना नहीं, बल्कि लेन अनुशासन और सही ओवरटेकिंग है। वहीं, कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि क्या महज शपथ लेने से सड़कों पर लापरवाही कम हो जाएगी? यूजर्स का मानना है कि जागरूकता के साथ-साथ लाइसेंसिंग प्रक्रिया में सख्ती और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई ही एकमात्र समाधान है।

क्या बदलेगी तस्वीर?

दमन प्रशासन की यह मुहिम बड़ी गाड़ी, बड़ी जिम्मेदारी का संदेश तो दे रही है, लेकिन असल चुनौती सड़कों पर व्यवहार बदलने की है। क्या ये शपथ लेने वाले चालक सड़क पर अपनी रसूख को पीछे छोड़कर नियमों का पालन करेंगे? यह बड़ा सवाल अब भी सोशल मीडिया की बहस का केंद्र बना हुआ है।

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