थार-फॉर्च्यूनर वालों की बढ़ी धड़कन: कलेक्टर ने लाइन में खड़ा कर दिलाई शपथ, जानें कौन हैं ये जाबांझ IAS?
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दमन की सड़कों पर इन दिनों एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। रौब और दबंगई दिखाने के लिए मशहूर थार और फॉर्च्यूनर गाड़ियों के मालिकों को जिला प्रशासन ने एक कतार में खड़ा कर दिया। यह कोई सजा नहीं, बल्कि एक खास मुहिम थी— थार-फॉर्च्यूनर संकल्प यात्रा । इस पहल की कमान संभाली दमन के कलेक्टर सौरभ मिश्रा ने, जिनका अपना करियर सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

भाईगिरी नहीं, जिम्मेदारी : अनोखा संदेश

दमन प्रशासन ने इस अभियान के जरिए एक कड़ा संदेश दिया है: बड़ी और पावरफुल गाड़ी का मतलब सड़कों पर कानून तोड़ना नहीं है। कलेक्टर सौरभ मिश्रा ने 150 से अधिक SUV मालिकों को शपथ दिलाई कि वे तेज रफ्तार, स्टंट, और लापरवाही से ड्राइविंग नहीं करेंगे। प्रशासन का नारा साफ था— भाईगिरी कूल नहीं है, जिम्मेदारी निभाना असली पहचान है।

MBBS, फिर IRS, बाद में IPS और अंत में IAS

सौरभ मिश्रा की चर्चा केवल इस अभियान के लिए नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और बहुमुखी करियर के लिए भी होती है। मध्य प्रदेश के रहने वाले सौरभ ने इंदौर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से MBBS किया था। उनका इरादा डॉक्टर बनने का था, लेकिन एक छोटी सी घटना ने सब बदल दिया।

एक मिस्ड फ्लाइट और बदला करियर का रास्ता

2007 में लंदन जाते समय उनकी फ्लाइट मिस हो गई। उस रात दोस्तों के साथ हुई चर्चा ने उन्हें UPSC की ओर प्रेरित किया। उन्होंने दोबारा विदेश जाने के बजाय दिल्ली में तैयारी शुरू की। साल 2008 में उन्होंने UPSC पास किया और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) चुनी। लेकिन उनका सफर यहीं नहीं रुका।

पुलिस से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

IRS में रहते हुए उन्होंने 2010 में फिर परीक्षा दी और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुने गए। वह मध्य प्रदेश में DSP और SP (CID) जैसे पदों पर रहे। अपनी पत्नी स्मिता सिंह के साथ तैयारी करते हुए, 2014 में उन्होंने फिर परीक्षा दी और इस बार 67वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का अपना सपना पूरा किया।

कौन हैं सौरभ मिश्रा?

2015 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी सौरभ मिश्रा वर्तमान में दमन के जिला कलेक्टर हैं। उनके पास वन, पर्यावरण, नगर प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण और एक्साइज जैसे कई अहम विभागों की जिम्मेदारी है।

क्या है दमन की इस मुहिम का मकसद?

कलेक्टर सौरभ मिश्रा का मानना है कि गाड़ियों के शौकीनों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। शपथ ग्रहण के बाद, इन गाड़ियों का एक काफिला निकाला गया ताकि आम जनता के बीच सुरक्षा का संदेश जाए। उन्होंने वाहन मालिकों से अपील की कि वे सड़क पर दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे आएं। यह अभियान अब सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है, जहां लोग इस अनोखी पहल की सराहना कर रहे हैं।

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