मंत्री की सुनवाई नहीं : कार्यकर्ता की मौत पर धरने पर बैठे संजय निषाद, विपक्ष ने घेरी सरकार
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद का दर्द और गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा, जब गोंडा में अपने कार्यकर्ता विनोद साहनी की मौत के बाद उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। गुरुवार देर रात लखनऊ के KGMU पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मंत्री का धरना इस बात का प्रमाण बन गया कि सत्ता में होने के बावजूद वे प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।

क्या है पूरा मामला?

गोंडा के विनोद साहनी पर कथित तौर पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल विनोद को इलाज के लिए KGMU लाया गया, जहां गुरुवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। संजय निषाद का आरोप है कि पीड़ित पर गोली और चाकुओं से हमला किया गया था। वहीं, पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि शरीर पर कोई गोली या धारदार हथियार के निशान नहीं मिले हैं, मौत लाठी-डंडों की चोटों के कारण हुई है।

सोशल मीडिया पोस्ट बना विवाद की जड़

पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि विनोद साहनी ने सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं और संतों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट किए थे। पुलिस का कहना है कि इसी बात से नाराज होकर स्थानीय लोगों के एक समूह ने उन पर हमला किया। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

लापरवाही पर पुलिस पर गिरी गाज

इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। गोंडा पुलिस ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में परसपुर थाना प्रभारी, शाहपुर चौकी प्रभारी और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक के मुताबिक, फरार चल रहे अन्य आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें छापेमारी कर रही हैं।

सियासी पारा हुआ गर्म

संजय निषाद ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैला देंगे। उन्होंने आरोपियों के एनकाउंटर और उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की मांग की है।

इस धरने को विपक्ष का भी साथ मिला। समाजवादी पार्टी के नेता राजपाल कश्यप और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने मौके पर पहुंचकर सरकार को घेरा। राजपाल कश्यप ने तंज कसते हुए कहा कि जब एक कैबिनेट मंत्री खुद धरने पर बैठने को मजबूर हो, तो यह प्रदेश की लचर कानून-व्यवस्था का सबसे बड़ा सबूत है।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या मंत्री का दबाव पुलिस को और सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर करेगा, या जांच केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इर्द-गिर्द सिमट कर रह जाएगी।

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