सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद एक पुरानी मस्जिद को गिराए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से गलत और अवैध करार दिया है।
1911 का बिजली बिल, फिर भी बुलडोजर क्यों? संजय सिंह ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मस्जिद 1947 से पहले की है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास 1911 के बिजली के बिल के दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा, यह जमीन जावेद खान और वलीद खान के नाम पर है और यह वक्फ बोर्ड में भी रजिस्टर्ड है। इतनी पुरानी संपत्ति को इस तरह ढहाना न्यायसंगत नहीं है।
कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं आप सांसद ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट (पूजा स्थल कानून) का हवाला देते हुए कहा कि संसद द्वारा पारित इस कानून में स्पष्ट है कि 1947 से पहले बने किसी भी धार्मिक स्थल के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। उन्होंने वक्फ बाय यूजर कानून का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशासन ने इन दोनों ही संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
बौखलाहट में माहौल खराब कर रही BJP सरकार पर तीखा हमला करते हुए संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बीजेपी के पास आज शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और रोजगार जैसे मुद्दों पर जनता को दिखाने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, बीजेपी को चुनाव हारने का डर है और इसी बौखलाहट में वे उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं। यदि वे दंगे और विवाद नहीं कराएंगे, तो चुनाव जीतना उनके लिए असंभव है।
स्कूलों पर खामोश, विवादों में सक्रिय संजय सिंह ने आगे कहा कि प्रदेश में स्कूल बंद हो रहे हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है, लेकिन बीजेपी का इस पर कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी लगातार मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और मेरठ जैसे स्थानों पर धार्मिक मुद्दों को हवा देकर प्रदेश की शांति को भंग करने की साजिश रच रही है।
क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि बीते 5 सितंबर को सहारनपुर प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच छह बुलडोजरों का इस्तेमाल कर कलेक्ट्रेट में स्थित मस्जिद को ढहा दिया था। प्रशासन का तर्क है कि जिला अदालत ने इस इमारत को सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण माना था और बेदखली के आदेश दिए थे, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बता रहा है।
*VIDEO | AAP leader Sanjay Singh (@SanjayAzadSln) says, See, the demolition of mosque in Saharanpur is completely wrong, because that mosque was built prior to 1947, the land is on the name on Javed Khan and Walid Khan, it is also registered on Waqf Board. There are two things,… pic.twitter.com/KWNmgfy9jI
— Press Trust of India (@PTI_News) September 9, 2026
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