बेंगलुरु में आयोजित एक स्पेस एक्सपो के दौरान भारतवंशी नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में काम करने की जमीनी हकीकत का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पृथ्वी से हजारों मील दूर अंतरिक्ष में जीवन सिर्फ रोमांच नहीं, बल्कि बड़ी चुनौतियों और तकनीकी बाधाओं से भरा है।
आईएसएस पर काम का भारी दबाव सुनीता विलियम्स ने बताया कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए काम का दबाव अत्यधिक रहता है। 25 साल पुराने इस स्टेशन की प्रक्रियाओं में बदलाव लाना आसान नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने के चक्कर में कई बार जटिल नौकरशाही (bureaucracy) पैदा हो जाती है, जिससे काम की गति प्रभावित होती है।
धरती जैसा इंटरनेट नहीं मिलता सबसे चौंकाने वाली बात बताते हुए सुनीता ने कहा कि अंतरिक्ष में हम पृथ्वी की तरह गूगल नहीं कर सकते। धरती पर हमें कोई जानकारी चाहिए हो तो तुरंत इंटरनेट का सहारा लेते हैं, लेकिन आईएसएस पर ऐसा कोई व्यापक डेटाबेस उपलब्ध नहीं है। किसी भी सवाल या समस्या के हल के लिए यात्रियों को पूरी तरह जमीन पर मौजूद कंट्रोल टीम के भरोसे रहना पड़ता है।
गुरुत्वाकर्षण: 3D प्रिंटिंग के लिए विलेन सुनीता के अनुसार, अंतरिक्ष में साधारण काम भी पहाड़ जैसे हैं। उन्होंने 3D प्रिंटिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि धरती पर मौजूद प्रिंटर गुरुत्वाकर्षण के हिसाब से बने होते हैं। शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) में ये मशीनें अक्सर फेल हो जाती हैं या ठीक से काम नहीं करतीं। भविष्य के मिशनों के लिए हमें ऐसे उपकरणों की जरूरत है जो बिना ग्रेविटी के सही ढंग से चल सकें।
भविष्य के स्टेशनों के लिए नया विजन आईएसएस अब अपने संचालन के अंतिम चरणों में है। सुनीता ने सुझाव दिया कि भविष्य में बनने वाले सरकारी या निजी स्पेस स्टेशनों को बिल्कुल नए सिरे से डिजाइन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज की तकनीक इतनी उन्नत होनी चाहिए कि अंतरिक्ष यात्रियों को कागजी कार्रवाई या जटिल प्रक्रियाओं में न फंसना पड़े, बल्कि वे सीधे डेटाबेस का उपयोग कर सकें।
क्या भारत तैयार है? आईएसएस के निर्माण का हिस्सा रहीं सुनीता विलियम्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्पेस स्टेशन बनाना बेहद कठिन काम था। हालांकि, उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की तारीफ की और भरोसा जताया कि भारत इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को उठाने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।
#WATCH | Bengaluru, Karnataka: Indian-origin NASA astronaut Sunita Williams says, We want to do things safely and reliably, and that has created some bureaucracy in our processes. Not to mention, it s busy up on the space station, and we don t have a lot of time to change things… pic.twitter.com/5EhmbT1okT
— ANI (@ANI) September 9, 2026
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