ओडिशा के बालासोर जिले के जंगलों में पांच नन्हे ओरंगुटानों का मिलना चर्चा का विषय बन गया है। एशिया में पाए जाने वाले इन दुर्लभ ग्रेट एप्स का भारत के जंगलों में प्राकृतिक रूप से कोई अस्तित्व नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि ये जीव हजारों किलोमीटर दूर ओडिशा के जंगल तक आखिर पहुंचे कैसे?
रेस्क्यू और नंदनकानन में सुरक्षा मंगलवार सुबह बालासोर के भोगराई इलाके में बादापई गांव के पास इन ओरंगुटानों को देखा गया था। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने सभी को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इन नन्हे जीवों को भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर ले जाया गया है, जहां वे क्वारंटीन में हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टर उनकी सेहत की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल, सरकार केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से इन्हें आधिकारिक तौर पर वहां रखने की अनुमति मांग रही है।
STF और WCCB ने शुरू की गहन जांच इस अनसुलझी पहेली को सुलझाने के लिए ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) सक्रिय हो गई है। STF की टीम घटना स्थल की जांच कर रही है और स्थानीय सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। WCCB की भोपाल और कोलकाता की टीमें भी मामले में शामिल हो रही हैं। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन्हें समुद्री, सड़क या हवाई मार्ग से तस्करी कर लाया गया था।
वन्यजीव तस्करी की आशंका ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने इस बात पर जोर दिया है कि ओरंगुटान भारत के प्राकृतिक वन्यजीव नहीं हैं। आशंका जताई जा रही है कि किसी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह ने इन्हें यहां छोड़ा है या ये किसी तस्करी खेप का हिस्सा थे। फिलहाल, अधिकारी रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के फुटेज की भी जांच कर रहे हैं ताकि तस्करी के नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।
क्यों असामान्य है यह घटना? ओरंगुटान मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों के वर्षावनों में ही पाए जाते हैं। इन द्वीपों और भारत के बीच कोई भी नेचुरल लैंड कॉरिडोर नहीं है। एक साथ पांच ओरंगुटानों का मिलना वैज्ञानिक दृष्टि से असंभव है, जिससे यह साफ होता है कि इनकी मौजूदगी पूरी तरह से मानवीय गतिविधियों का परिणाम है।
जांच के बाद खुलेगा राज STF के डीआईजी केवी सिंह का कहना है कि जांच प्रारंभिक चरण में है और बिना ठोस प्रमाण के कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। एजेंसियां भारत में हुए पूर्व के ऐसे ही मामलों का अध्ययन कर रही हैं। फिलहाल, ये पांचों ओरंगुटान सुरक्षित हैं, लेकिन उनके भारत आने के पीछे की कहानी अभी भी एक बड़ा रहस्य बनी हुई है।
*As 5 orangutans find new home in Odisha, a probe into how they landed there https://t.co/tMfYYHqoi9 pic.twitter.com/1FV2QejMHc
— The Indian Express (@IndianExpress) September 9, 2026
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