नई दिल्ली: देश में जाति जनगणना को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जाति जनगणना की प्रक्रिया को जानबूझकर विफल करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सरकार द्वारा प्रश्नावली में बदलाव करना सामाजिक न्याय के रास्ते में एक बड़ी बाधा है।
क्या है कांग्रेस की मुख्य आपत्ति? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को सरकार के ड्रॉप-डाउन सूची वाले फैसले पर निशाना साधा। रमेश का कहना है कि जनगणना में ओपन-एंडेड सवाल होने चाहिए थे, लेकिन सरकार ने ड्रॉप-डाउन का विकल्प चुना है। इसमें व्यक्ति को अपनी जाति खुद लिखने के बजाय पहले से मौजूद विकल्पों में से चुनना होता है, जो कि भ्रामक है।
प्रक्रिया फेल करने की साजिश जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ऐसा लगता है प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि एक ही जाति के अलग-अलग नाम और वर्तनी (स्पेलिंग) की वजह से डेटा में भारी गड़बड़ी हो। इससे जनगणना की पूरी प्रक्रिया ही विफल हो जाएगी। कांग्रेस का मानना है कि सही आंकड़े ही सामाजिक न्याय की नींव होते हैं।
क्या है ओपन-एंडेड और ड्रॉप-डाउन का फर्क? ड्रॉप-डाउन सूची में सीमित विकल्प होते हैं, जिससे डेटा का दायरा संकुचित हो जाता है। वहीं, ओपन-एंडेड प्रारूप में उत्तरदाता अपनी जाति का सटीक विवरण दे सकता है। कांग्रेस का तर्क है कि सीमित विकल्पों के कारण कई जातियां और उप-जातियां छूट जाएंगी।
राहुल-खरगे के पत्र का जवाब नहीं कांग्रेस ने जानकारी दी है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 अगस्त को ही प्रधानमंत्री को संयुक्त पत्र लिखा था। इसमें वर्तमान प्रश्नावली को रद्द करने और प्रमाणित जाति सूचियों के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की गई थी।
समाधान क्या है? जयराम रमेश ने बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वहां पहले से प्रमाणित जाति सूचियों का उपयोग किया गया था, जो एक व्यावहारिक तरीका है। कांग्रेस ने मांग की है कि कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले सरकार को राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए।
जातिगत जनगणना का मतलब सिर्फ जातियों की गिनती नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 9, 2026
सही तरीके के प्रश्न → सही आंकड़े → सही हिस्सेदारी → सामाजिक न्याय
कांग्रेस द्वारा बार-बार मांग उठाने के बावजूद मोदी सरकार द्वारा जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में ड्रॉपडाउन सूची के… pic.twitter.com/jZV9SfS2VR
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