दिल्ली के सत्य निकेतन में जब एक पांच मंजिला इमारत मलबे में तब्दील हुई, तो बचाव अभियान में पुलिस और फायर ब्रिगेड के साथ एक और नाम ने सबका ध्यान खींचा— ब्लिंकइट एम्बुलेंस । स्थानीय लोगों और छात्रों के मुताबिक, सरकारी तंत्र के पहुंचने से पहले ही इस निजी कंपनी की एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गईं। इसने दिल्ली के उस सरकारी इमरजेंसी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके पास 330 एम्बुलेंस की बड़ी फौज होने का दावा है।
सत्य निकेतन में 30 साल पुरानी एक इमारत ढह गई थी, जो छात्रों के लिए PG के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। दोपहर 1:34 बजे पहली PCR कॉल गई। चश्मदीदों के अनुसार, ब्लिंकइट की पहली एम्बुलेंस शुरुआती मिनटों में ही वहां मौजूद थी। दावा है कि अगले 90 मिनट के भीतर कंपनी की 9 एम्बुलेंस और 27 पैरामेडिक्स ने मोर्चा संभाल लिया। इन्होंने घायलों को प्राथमिक उपचार देने के साथ-साथ ऑक्सीजन भी मुहैया कराई।
दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण (2025-26) के मुताबिक, शहर में CATS के तहत 330 एम्बुलेंस काम कर रही हैं। इनमें 62 एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) और 249 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) गाड़ियां शामिल हैं। सरकार का दावा है कि औसतन 15 मिनट के भीतर मदद पहुंचाई जाती है। वहीं, ब्लिंकइट का दावा है कि उनके पास केवल 63 एम्बुलेंस हैं, लेकिन उनका औसत रिस्पॉन्स टाइम 9 मिनट है।
आंकड़ों का यह 6 मिनट का फासला सामान्य लग सकता है, लेकिन किसी हार्ट अटैक, भारी रक्तस्राव या मलबे में दबे व्यक्ति के लिए यह जीवन-मरण का अंतर साबित हो सकता है। सरकारी एम्बुलेंस नेटवर्क का दायरा पूरी दिल्ली में फैला है, जबकि निजी सेवा सीमित इलाकों में सक्रिय है। लेकिन सवाल यह है कि यदि एक निजी ऐप-आधारित सेवा तकनीक और रियल-टाइम ट्रैकिंग की बदौलत तेजी से रिस्पॉन्स दे सकती है, तो सरकारी तंत्र के विशाल बेड़े में वह फुर्ती क्यों नहीं दिखती?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाना समाधान नहीं है। सरकारी सिस्टम में कई चुनौतियां हैं:
ब्लिंकइट का एम्बुलेंस मॉडल यह दिखाता है कि तकनीक, सटीक लोकेशन ट्रैकिंग और त्वरित डिस्पैच के जरिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाया जा सकता है। यह सेवा न केवल अस्पताल चुनने की आजादी देती है, बल्कि मरीज को अस्पताल में भर्ती होने तक साथ निभाती है।
सत्य निकेतन की घटना ने साफ कर दिया है कि दिल्ली को सिर्फ एम्बुलेंस के बड़े बेड़े की नहीं, बल्कि एक ऐसे स्मार्ट डिस्पैच सिस्टम की जरूरत है, जो बिना किसी देरी के सबसे नजदीकी मदद को घटनास्थल तक पहुंचा सके। क्या अब समय आ गया है कि सरकार अपने सरकारी इमरजेंसी नेटवर्क को निजी कंपनियों की तरह टेक-ड्रिवन बनाए?
#WATCH | Delhi | Satya Niketan building collapse | A person has been rescued alive from the debris and is being sent to the hospital via an ambulance.
— ANI (@ANI) September 6, 2026
Rescue operations underway. Further details awaited. pic.twitter.com/fmM7gMeS3T
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