साड़ी और ब्लाउज का इतिहास हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेत्री दिया मिर्जा और ऋचा चड्ढा ने भारत में महिलाओं के पहनावे और संस्कृति पर चर्चा की। इस चर्चा में दिया मिर्जा ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारत में साड़ी के नीचे ब्लाउज पहनने का चलन कभी था ही नहीं। उन्होंने इसे विक्टोरियन (अंग्रेजों की देन) संस्कृति करार दिया।
मुगल काल का हवाला और विवाद दिया मिर्जा ने तर्क दिया कि मुगल काल की पेंटिंग्स और कलाकृतियों में महिलाएं पारदर्शी कुर्ते पहनती थीं और उस समय ब्रा या ब्लाउज जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं था। उन्होंने कहा, स्तनों को ढकने का यह कल्चर विदेशी है, यह हमारा भारतीय इतिहास नहीं है। वहीं, ऋचा चड्ढा ने इस बहस में खजुराहो की मूर्तिकला का उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग पहनावे पर सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने शायद इतिहास और धर्म को कभी ठीक से पढ़ा ही नहीं है।
कृति सेनन के विज्ञापन से शुरू हुआ था बवाल यह पूरी बहस रक्षाबंधन के मौके पर आए कृति सेनन के एक विज्ञापन से शुरू हुई थी। उस विज्ञापन में कृति ने इंडो-वेस्टर्न आउटफिट के साथ ब्रालेट टॉप पहना था, जिसका जमकर विरोध हुआ। कंगना रनौत सहित कई लोगों ने इसे त्योहार की गरिमा के खिलाफ बताया था, जिसके बाद कंपनी को विज्ञापन हटाना पड़ा था।
सोशल मीडिया पर भड़के यूजर्स अभिनेत्रियों के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने तंज कसते हुए पूछा, जब कपड़ों का आविष्कार ही नहीं हुआ था, तब इंसान बिना कपड़ों के रहते थे, तो क्या आज भी हमें खानाबदोशों की तरह रहना चाहिए?
इतिहास पर दी गई नसीहतें कई यूजर्स ने इतिहास का हवाला देते हुए लिखा कि भारत में इस्लामी आक्रमणों के बाद ही महिलाओं ने सुरक्षा के लिहाज से खुद को ढकना शुरू किया था। लोगों ने अभिनेत्रियों को सलाह दी कि वे संस्कृति और इतिहास की गलत व्याख्या न करें। फिलहाल, यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा और आलोचना का केंद्र बना हुआ है।
Everyone must listen to the nonsense spoken by Dia Mirza and Richa Chadha!!
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) September 6, 2026
The host talks about how a culture gets destroyed by women wearing less clothes.
Dia Mirza says, “In India, women used to wear nothing under the saree during the Mughal era, so how is culture getting… pic.twitter.com/llJzQIrtXj
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