सत्य निकेतन हादसा: CM रेखा गुप्ता का कड़ा रुख, PG और जर्जर इमारतों पर होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट
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सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने के दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली की राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कल से ही ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाले हुए हैं। सोमवार सुबह एक बार फिर घटनास्थल पर पहुँचकर उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की और अधिकारियों को बिना किसी ढिलाई के काम जारी रखने के आदेश दिए।

रेस्क्यू और बचाव में जुटीं एजेंसियां NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और MCD की टीमें मलबे से संभावित फंसे लोगों को निकालने के लिए रात-दिन जुटी हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जाए ताकि किसी भी जान को जोखिम से बाहर निकाला जा सके। स्थिति पर खुद मुख्यमंत्री की नजर बनी हुई है।

इमारत हादसे की पीछे क्या है वजह? प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में PG चल रहा था, वहां निर्माण कार्य चल रहा था। बेसमेंट में जमा पानी और पुरानी इमारत की कमजोर संरचना इस हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। जांच के बाद ही अंतिम कारणों का पता चलेगा, लेकिन इस घटना ने दिल्ली की पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लापरवाही पर एक्शन: भवन मालिक के बाद अब अधिकारियों की बारी इस हादसे के बाद सरकार का रुख बेहद सख्त है। भवन मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। वहीं, MCD ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच बड़े अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई निगरानी में बरती गई लापरवाही के चलते की गई है। मामले की मजिस्ट्रियल जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं।

अब PG और स्कूलों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भविष्य के लिए बड़ा ऐलान किया है। अब दिल्ली में सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों, जैसे PG, नर्सिंग होम और स्कूलों का अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन कराया जाएगा। बिना सुरक्षा प्रमाणन के किसी भी भवन में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार इसे लेकर एक नई नीति तैयार कर रही है।

खतरनाक इमारतों पर होगी बुलडोजर कार्रवाई सत्य निकेतन के आसपास के इलाकों में प्रशासन ने असुरक्षित ढांचों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। कई इमारतों को खाली कराया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि जान जोखिम में डालकर कोई भी गतिविधि नहीं चलने दी जाएगी। जो भी इमारत असुरक्षित पाई जाएगी, उसे गिराने की कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी को टाला जा सके।

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