डॉ. दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल, प्रोफेसर से राजभवन तक का सफर
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नयी दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को एक नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रपति भवन ने शनिवार देर रात जारी अधिसूचना में उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त करने की घोषणा की है।

शिक्षक से राजनीति के शिखर तक डॉ. दिनेश शर्मा का करियर जितना अकादमिक रहा है, उतना ही राजनीतिक रूप से प्रभावशाली भी। 1988 से लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य के प्रोफेसर के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले डॉ. शर्मा ने अपनी बौद्धिक साख के साथ-साथ जमीनी राजनीति में भी गहरी पकड़ बनाई। उनका अपना शिक्षण संस्थान भी है, जो शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाता है।

आरएसएस से भाजपा तक का सफर उनकी राजनीतिक यात्रा की नींव एबीवीपी (ABVP) से पड़ी। वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। 2014 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी नियुक्त किया गया। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय सदस्यता अभियान की बागडोर भी संभाली थी।

लखनऊ के लोकप्रिय महापौर डॉ. शर्मा के राजनीतिक कौशल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लगातार दो बार (2006 और 2012) लखनऊ के महापौर चुने गए। एक संस्कारी और मिलनसार छवि के कारण विपक्ष भी उनका सम्मान करता रहा है। उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे नीरज बोरा के अनुसार, डॉ. शर्मा की सबसे बड़ी ताकत उनकी बेदाग छवि है। वे एक ऐसे राजनेता हैं, जिनके खिलाफ शायद ही कोई नकारात्मक टिप्पणी सुनने को मिले।

यूपी की राजनीति में अहम योगदान मार्च 2017 से 2022 तक, दिनेश शर्मा ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में सेवाएं दीं। वे वर्तमान भाजपा नेतृत्व के काफी करीब माने जाते हैं। साल 2023 में उन्हें राज्यसभा सांसद के रूप में उच्च सदन भेजा गया। अब अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल के रूप में, वे केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन को अपनी कुशल कार्यशैली से नई दिशा देने के लिए तैयार हैं।

सादगी और निष्ठा की पहचान उनके परिवार और सहयोगियों का मानना है कि उनकी सादगी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद, जमीन से जुड़े रहना और विवादों से दूर रहना ही डॉ. शर्मा के लंबे और सफल राजनीतिक करियर का आधार बना है। अब अंडमान-निकोबार की जिम्मेदारी के साथ, उनके करियर का एक नया अध्याय शुरू हो गया है।

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