एक ही देश, तीन अलग-अलग मौसम: कश्मीर में बर्फबारी, दिल्ली में बारिश और बिहार में बाढ़ का क्या है विज्ञान?
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इन दिनों भारत का मौसम किसी पहेली की तरह है। एक तरफ 5 सितंबर को कश्मीर की वादियों में सीजन की पहली बर्फबारी ने सर्दियों की दस्तक दे दी है, तो दूसरी तरफ दिल्ली-NCR की सड़कें भारी बारिश से लबालब हैं। वहीं, बिहार और असम जैसे राज्यों में उफनती नदियां और दमघोंटू उमस लोगों का जीना मुहाल कर रही हैं।

सवाल यह है कि आखिर एक ही देश में मौसम के इतने विरोधाभासी रंग एक साथ क्यों दिख रहे हैं? आइए इसे समझते हैं।

पहाड़ों की ऊंचाई और तापमान का गणित

मौसम के इस अंतर की सबसे बड़ी वजह हमारे देश की भौगोलिक बनावट और ऊंचाई है। गुलमर्ग और सोनमर्ग जैसे इलाके समुद्र तल से 8 से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान गिरता है, जिससे वहां पानी की जगह बर्फबारी होती है। इसके उलट दिल्ली और बिहार के मैदानी इलाके काफी नीचे स्थित हैं, जहां गर्मी अधिक होने के कारण बादल केवल बारिश ही कर पाते हैं।

दो बड़े मौसमी सिस्टम का मिलन

भारत में इस समय दो अलग-अलग मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं:

  1. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): भूमध्य सागर से आने वाली ये ठंडी हवाएं हिमालयी क्षेत्र से टकराकर उत्तर भारत में बर्फ और बारिश लाती हैं।
  2. मानसूनी हवाएं: बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी भरी मानसूनी हवाएं मध्य और पूर्वी भारत में बारिश का मुख्य कारण हैं।

दिल्ली-NCR: हवाओं का जंक्शन

दिल्ली-एनसीआर एक ऐसे चौराहे पर स्थित है जहां पश्चिम की ठंडी हवाएं और पूरब की नम मानसूनी हवाएं आपस में टकराती हैं। हवाओं के इस टकराव (Convergence) के कारण अचानक घने बादल बनते हैं और तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश होती है, जैसा कि इन दिनों राजधानी में देखा जा रहा है।

बिहार में बाढ़ और उमस क्यों?

बिहार की स्थिति अलग है। बंगाल की खाड़ी के करीब होने के कारण यहाँ हवा में 80 से 90% तक नमी रहती है। जब तापमान 32 से 35 डिग्री के बीच होता है, तो पसीना नहीं सूखता, जिससे दमघोंटू उमस पैदा होती है। वहीं, नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश का पानी कोसी, गंडक जैसी नदियों में आने से हर साल निचले इलाकों में बाढ़ का संकट खड़ा हो जाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

मौसम विभाग (IMD) के डीजी डॉ. मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार, भारत का विशाल आकार और अत्यधिक ऊंचाई वाली जमीन ही इस विविधता का मुख्य कारण है। जब पश्चिमी हवाएं और मानसूनी हवाएं एक साथ जोर पकड़ती हैं, तो देश के विभिन्न हिस्सों में एक ही समय पर बाढ़, भारी बारिश और बर्फबारी जैसे अलग-अलग नजारे देखने को मिलते हैं।

संक्षेप में कहें तो, भारत का अनोखा भूगोल ही हिमालय की बर्फीली ठंड और समुद्र की नमी वाली उमस को एक ही समय में एक साथ पिरोता है।

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