राम मंदिर ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य: RSS से पुराना नाता और संघर्ष की कहानी
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अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल हुआ है। ट्रस्ट को न केवल अपना पहला सीईओ मिला है, बल्कि इतिहास में पहली बार किसी महिला को ट्रस्टी के तौर पर शामिल किया गया है। डॉ. निर्मला यादव की नियुक्ति ने पूरे फिरोजाबाद में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है।

कौन हैं डॉ. निर्मला यादव? मूल रूप से एटा की रहने वाली डॉ. निर्मला यादव लंबे समय से शिकोहाबाद में बसी हैं। वे शिक्षा जगत से जुड़ी रही हैं और 2016 से 2021 तक फिरोजाबाद के महात्मा गांधी महिला परास्नातक महाविद्यालय में प्राचार्य के पद पर कार्य कर चुकी हैं। 2021 में सेवानिवृत्त होने के बाद से वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।

राम मंदिर आंदोलन से गहरा जुड़ाव निर्मला यादव का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से दशकों पुराना नाता है। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, वे 1974 से ही संघ से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनकी यही निष्ठा और समर्पण उन्हें इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी तक ले आया।

मेरे लिए गर्व का क्षण ट्रस्ट में अपनी नियुक्ति पर डॉ. निर्मला यादव ने भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस जिम्मेदारी की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने इसे अपने और देश के लिए गर्व की बात बताते हुए कहा कि राम मंदिर पूरी दुनिया के लिए आस्था का केंद्र है और इस सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य है। उनकी बहू सीमा यादव ने बताया कि उनके फिरोजाबाद लौटने पर भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही है।

ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव निर्मला यादव के साथ ही ट्रस्ट के विस्तार में कई अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गई हैं। एयर मार्शल (रिटायर) जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, पूर्व कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि अब ट्रस्ट के महासचिव होंगे, जबकि महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

देशभर में जश्न का माहौल ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में खुशी की लहर है। जहां फिरोजाबाद में डॉ. निर्मला यादव के आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा है, वहीं देवरिया के भोपतपुरा गांव में एयर मार्शल (रिटायर) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर स्थानीय लोगों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया है। इन नियुक्तियों को राम मंदिर प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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