मूंछों पर ताव, अखिलेश को चुनौती: कौन हैं मैनपुरी के दबंग CO अशोक कुमार सिंह?
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस के एक अधिकारी का तेवर चर्चा का विषय बना हुआ है। सीओ (CO) सिटी अशोक कुमार सिंह का यह वीडियो विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को दी गई सीधी चुनौती के कारण सुर्खियों में है।

इस वीडियो में अधिकारी को अपनी मूंछों पर ताव देते हुए यह कहते सुना जा सकता है, जाओ अखिलेश को बता देना। इस घटना के बाद से ही हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर ये अधिकारी कौन हैं और उन्होंने ऐसा क्यों कहा?

कौन हैं अशोक कुमार सिंह?

अशोक कुमार सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारी हैं। हाल ही में इंस्पेक्टर पद से प्रमोट होकर वे क्षेत्राधिकारी (CO) बने हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 4 जून 2026 को हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के दौरान उन्हें मैनपुरी में बतौर सीओ सिटी तैनात किया गया था। इससे पहले, उन्होंने औरैया जिले में भी अपनी सेवाएं दी थीं।

गौ तस्करों पर कसा था शिकंजा

औरैया में तैनाती के दौरान अशोक कुमार सिंह अपनी सख्त कार्यशैली के लिए चर्चा में आए थे। उस समय आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर उमरैन चौकी के पास पुलिस ने तस्करी के लिए ले जाए जा रहे 11 गोवंश बरामद किए थे। तत्कालीन सीओ बिधूना के तौर पर अशोक कुमार सिंह इस ऑपरेशन का हिस्सा थे और उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की थी, जिसने उन्हें एक कड़क पुलिस अधिकारी की छवि दी थी।

वायरल वीडियो का सच क्या है?

30 अगस्त 2026 को मैनपुरी के अलाउ थाना क्षेत्र के अघार गांव में एक हेल्पर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मोहित यादव नाम के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया था।

अशोक कुमार सिंह ने इस विवाद पर सफाई देते हुए बताया कि गांव के दो प्रधानों के बीच पुरानी रंजिश चल रही है। उन्होंने कहा, एक पक्ष की ओर से मुझे विशेष जाति का बताकर कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की गई। वहां मौजूद लोगों ने धमकी दी कि वे वीडियो अखिलेश यादव को भेजेंगे। जवाब में मैंने कहा कि यदि वे वीडियो भेज सकते हैं, तो जरूर भेजें।

निष्पक्ष कार्रवाई पर अडिग

अधिकारी का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की है। उनका मूंछों पर ताव देने वाला अंदाज और अखिलेश यादव का नाम लेने वाला लहजा सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ इसे अधिकारी का दबंग अंदाज कहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल, यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन, बल्कि सियासी हलकों में भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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